भारत विदेशी निवेशकों द्वारा देश के बॉन्ड पर दिए जाने वाले टैक्स में भारी कटौती करने पर विचार कर रहा है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक भारत अपनी नीतियों को ग्लोबल मानकों के अनुरूप बनाने और पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए यह कदम उठाने पर विचार कर रहा है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुतबिक भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस कदम की सिफ़ारिश की है,जिस पर वित्त मंत्रालय गंभीरता से विचार कर रहा है। सूत्रों ने आगे कहा कि टैक्स का बोझ कम करने पर विचार तेज हो गया है। सरकार रुपये की गिरती कीमत को रोकने की कोशिश कर रही है।
वित्त मंत्रालय और भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस बारे में जानकारी हासिल करने के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया है।
पॉलिसी मेकर्स ने अब तक करेंसी की गिरावट को रोकने के लिए बचाव के कई उपाय किए हैं,जिनमें ट्रेडिंग पोज़िशन्स साइज को सीमित करना भी शामिल है। ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ने से बढ़ते आयात बिल को पूरा करने के लिए पूंजी प्रवाह को आकर्षित करना और भी ज्यादा जरूरी हो गया है। 2026 में अब तक रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी रहा है,जो डॉलर के मुकाबले 6% से ज्यादा गिर गया है।
कूपन भुगतानों से होने वाली ब्याज आय पर लगभग 20% लगता है टैक्स
विदेशी निवेशकों को अपने क्षेत्र के आधार पर शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के कैपिटल गेन्स टैक्स देने होते हैं। भारत ने दर्जनों देशों के साथ समझौते किए हैं,जिनके तहत कुछ निवेशकों को कम टैक्स दरों का लाभ मिल पाता है। कूपन भुगतानों से होने वाली ब्याज आय पर लगभग 20% टैक्स लगता है। विदेशी निवेशक पहले ब्याज आय पर केवल 5% टैक्स देते थे,लेकिन वह रियायत 2023 में समाप्त हो गई।
1.3 लाख करोड़ डॉलर के बाजार में विदेशी हिस्सेदारी सिर्फ़ 3%
विदेशी निवेशकों ने भारत में अपने ऊपर पड़ने वाले भारी टैक्स बोझ के बारे में कई बार आवाज उठाई है। इंडोनेशिया,मलेशिया,मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका जैसे दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में भारत में विदेशी निवेशकों पर बहुत ज्यादा टैक्स लगता है। इस भारी टैक्स की वजह से 1.3 लाख करोड़ डॉलर के इस बाजार में विदेशी हिस्सेदारी सिर्फ़ 3% है,जबकि अब भारतीय सरकारी बॉन्ड JPMorgan Chase & Co और FTSE Russell जैसे बड़े इंडेक्स में शामिल हो चुके हैं।
लॉन्ग टर्म में टैक्स नीतियों को ग्लोबल मानकों के अनुरूप बनाना,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को पूरा करने में सहायक हो सकता है।