Zerodha को एक ट्रेडर को मुआवजा देना पड़ रहा है। वजह, Zerodha प्लेटफॉर्म पर तकनीकी खराबी आ जाने के कारण ट्रेडर को नुकसान हो गया और उसने मुआवजे के लिए कंपनी के खिलाफ मुआवजे का दावा कर दिया। ट्रेडर यह दावा जीत चुका है और अब Zerodha उसे मुआवजा दे रही है। मनीकंट्रोल को मिली जानकारी के मुताबिक, मिले आदेश के अनुरूप Zerodha ट्रेडर को अभी तक 8,225 रुपये का भुगतान कर चुकी है। कहा जा रहा है कि ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर तकनीकी खामी के मामलों में आगे चलकर यह फैसला काफी मायने रखेगा।
ट्रेडर ने मुआवजे का दावा BSE की शिकायत निवारण समिति (Grievance Redressal Committee GRC) के समक्ष किया था और GRC ने Zerodha को तकनीकी गड़बड़ी के कारण ट्रेडर को हुए नुकसान की भरपाई करने का आदेश दिया। इस आदेश के अन्य ट्रेडर्स के लिए रास्ते खोलने की उम्मीद है और हो सकता है कि और ज्यादा मुआवजे दावे फाइल हों। हालांकि Zerodha ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा है कि यह पूरी तरह से गलत था। GRC के कुछ ऑब्जर्वेशंस स्पष्ट तौर पर गलत हैं।
यह मामला 7 जुलाई का है, जब अपनी अधिकतम क्षमता तक बैंडविड्थ के इस्तेमाल के कारण पैदा हुई तकनीकी गड़बड़ी के चलते एक ट्रेडर को नुकसान हो गया। यही मुद्दा 30 जून को भी सामने आया था, जिसके कारण ट्रेडर्स दिन के आखिर में अपनी पोजिशंस क्लोज नहीं कर पा रहे थे। आदेश में GRC का दावा है कि ट्रेडर (शिकायतकर्ता) को हुए नुकसान के लिए Zerodha जिम्मेदार है। इसलिए उसके दावे कायम रखने योग्य हैं, यानी सही हैं।
ट्रेडर ने दलील दी है कि उसने 7 जुलाई को सेंसेक्स पुट बेच दिया था। लेकिन जब वह प्रॉफिट में थी और अपनी पोजीशन को क्लोज करने की कोशिश कर रही थी तो एक तकनीकी गड़बड़ी हुई और वह ऐसा नहीं कर सकी। ट्रेडर को Zerodha के कस्टमर केयर पर कॉल करने से भी मदद नहीं मिली। आखिर में उसका मुनाफा काफी हद तक डूब गया और फिर उसने Zerodha के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इस पर Zerodha ने दलील दी कि मुनाफे में कमी एक नोशनल लॉस या अपॉर्च्युनिटी लॉस है, जिसके लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। हालांकि कंपनी ने यह स्वीकारा कि सर्विसेज में अवरोध था।
वहीं GRC ने अपने आदेश में कहा है कि 30 जून को बैंडविड्थ यूटिलाइजेशन की समस्या होने के बावजूद Zerodha ने अपने ग्राहक को बिना किसी बैकअप प्लान के 7 जुलाई को ऑर्डर एग्जीक्यूट करने दिया। इसलिए Zerodha का यह दावा कि नुकसान के पीछे की वजह उसके नियंत्रण से परे है, बेबुनियाद है। जीआरसी ने यह भी कहा कि एक्सचेंज अधिकारियों ने Zerodha को बैंडविड्थ के 70 प्रतिशत यूटिलाइजेशन पर अलर्ट भेजा था। फिर भी कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। इस तरह GRC ने ट्रेडर के नुकसान के लिए Zerodha को जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया।
सोशल मीडिया पर मामला उछलने के बाद Zerodha के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर वेणु माधव ने कहा कि बीएसई ने कभी भी 70 प्रतिशत बैंडविड्थ यूटिलाइजेशन के उल्लंघन पर अलर्ट नहीं भेजा। उन्होंने GRC की टिप्पणी को गलती करार दिया है। माधव ने ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि सच तो यह है कि आज तक मेंबर्स के लिए दिन के दौरान बैंडविड्थ यूटिलाइजेशन को सक्रिय रूप से ट्रैक करने का कोई सिस्टम नहीं है। 7 जुलाई के बड़े इश्यू के 14 दिन बाद 21 जुलाई 2023 को स्टॉक एक्सचेंज ने एक सर्कुलर 6 जारी किया कि ट्रेडिंग मेंबर्स को बैंडविड्थ यूटिलाइजेशन के बारे में सूचित करने के लिए ईमेल के माध्यम से रिपोर्ट भेजी जाएगी।
माधव ने दावा किया है कि जब Zerodha को आखिरकार 30 जून के लिए अपनी बैंडविड्थ यूटिलाइजेशन रिपोर्ट मिली तो किसी भी रिपोर्ट में किसी भी अतिरिक्त यूटिलाइजेशन का संकेत नहीं मिला। माधव ने यह भी कहा कि Zerodha के सिस्टम को एक्सचेंजों से जोड़ने वाली 4 mbps की लीज्ड लाइन की तुलना ब्रॉडबैंड लाइन से नहीं की जा सकती है। यह एक्सचेंज द्वारा सप्लाई की जाने वाली मिनिमम बैंडविड्थ है। ये लीज्ड लाइनें बहुत प्रासंगिक हैं और केवल कंप्रेस्ड एक्सचेंज प्रोटोकॉल मैसेजेस को ट्रांसमिट करती हैं, जो आम तौर पर केवल कुछ सौ बाइट्स तक ही आते हैं। आमतौर पर किसी भी समय ऐसी डेडिकेटेड लीज्ड लाइन का केवल एक स्मॉल परसेंटेज ही इस्तेमाल किया जाता है। Zerodha का यह भी कहना है कि उसने 30 जून को पहली गड़बड़ी होने के बाद बैंडविड्थ के एक्सटेंशन के लिए आवेदन किया था। लेकिन 7 जुलाई तक ऐसा नहीं हुआ।