PLI Scheme की आहट पर चमके ये दो रेलवे स्टॉक, एक इंट्रा-डे में पहुंच गया अपर सर्किट पर

Multibagger Stocks: रेलवे भी जल्द पीएलआई स्कीम के दायरे में आ सकता है। इसकी सुगबुगाहट पर रेलवे सेक्टर के दो स्टॉक्स में खरीदारी बढ़ गई। एक तो लगातार चौथे दिन आज अपर सर्किट पर है। वहीं दूसरा शेयर एक कारोबारी दिन पहले दो फीसदी से अधिक चढ़ा था और आज मुनाफावसूली के चलते थोड़ा सुस्त है। जानिए रेलवे को पीएलआई स्कीम के तहत लाने पर क्या होगा और सरकार इसकी योजना क्यों बना रही है

अपडेटेड Aug 17, 2023 पर 4:37 PM
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पीएलआई स्कीम की सुगबुगाहट पर जुपिटर वैगन्स और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स में खरीदारी बढ़ी है। हालांकि ये काफी समय से तगड़ा रिटर्न दे रहे हैं और मल्टीबैगर साबित हुए हैं।
     
     
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    देश में ही उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर खर्च को कम करने के उद्देश्य से मार्च 2020 में केंद्र सरकार ने प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव (PLI) योजना पेश की थी। इस योजना के तहत भारत में बने प्रोडक्ट की बिक्री के आधार पर कंपनियों को इंसेंटिव मिलता है। अब सरकार की योजना इस योजना का लाभ ट्रेन कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों को देने की है। इसके चलते जुपिटर वैगन्स (Jupiter Wagons) और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स (Titagarh Rail Systems) के शेयरों की खरीदारी बढ़ गई। जुपिटर वैगन्स में तो लगातार चौथे दिन आज अपर सर्किट लग गया तो दूसरी तरफ टीटागढ़ रेल सिस्टम्स बुधवार 16 अगस्त को 2 फीसदी से अधिक ऊपर चढ़ा था लेकिन आज मुनाफावसूली के चलते रेड जोन में आ गया।

    पीएलआई स्कीम की सुगबुगाहट पर जुपिटर वैगन्स और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स में खरीदारी बढ़ी है। हालांकि ये काफी समय से तगड़ा रिटर्न दे रहे हैं और मल्टीबैगर साबित हुए हैं। जुपिटर वैगन्स इस साल 372 फीसदी चढ़ा है और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स 194 फीसदी। दिन के आखिरी में बीएसई पर जुपिटर वैगन्स 0.96 फीसदी की तेजी के साथ 274 रुपये और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स 1.17 फीसदी की गिरावट के साथ 663.65 रुपये पर बंद हुआ है।

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    PLI Scheme में शामिल होने से क्या होगा

    पीएलआई स्कीम के तहत देश में ही बनाए गए प्रोडक्ट की बिक्री पर कंपनियों को इंसेंटिव मिलता है। अब अगर ट्रेन कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों को इसका फायदा मिलता है तो इंसेंटिव मिलने के चलते उनकी वित्तीय सेहत मजबूत होगी और विस्तार करने के लिए माहौल तैयार होगा। हालांकि इस काम के लिए पहले बड़े पैमाने पर आयात होने वाले सामानों की सूची तैयार होगी, फिर उसके बाद रेलवे के लिए पीएलआई स्कीम आ सकती है।

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    सरकार क्यों लाना चाहती है रेलवे को पीएलआई योजना के तहत

    सरकार की योजना देश में रेलवे के सिर्फ दो प्रकार के पैसेंजर कोच रखने की है, एक लिंके हॉफमन बुश (Linke Hofmann Busch-LHB) और दूसरा वंदे भारत। इसके अलावा देश में जैसे-जैसे वंदे भारत ट्रेन का नेटवर्क बढ़ रहा है, रेलवे की पार्ट्स की भी जरूरत बढ़ेगी। ऐसे में अगर रेलवे सेक्टर को भी पीएलआई के दायरे में लाया जाता है तो आयात पर खर्च कम होगा। अभी एलएचबी कोच के करीब 1.5 फीसदी पार्ट आयात होते हैं जबकि वंदे भारत के 15 फीसदी पार्ट्स विदेशों से आते हैं। वहीं सरकार की योजना वर्ष 2047 तक देश में करीब 4500 वंदे भारत ट्रेन चलाने की है यानी देश में प्रोडक्शन को बढ़ावा नहीं दिया गया तो आयात बिल बढ़ेगा और प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई स्कीम तुरुप का इक्का साबित हो सकता है।

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