अमेरिका में हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में बायोसेक्योर एक्ट पारित हो गया है। इस साल के अंत तक इसके सीनेट में पास हो जाने की उम्मीद है। उसके बाद यह कानून लागू हो जाएगा। इसके बाद चीन की बायोटेक सप्लाई चेन और अमेरिकी बायोटेक वैल्यू चेन के बीच का संबंध खत्म हो जाएगा। इससे इंडियन सीआरएएमएस इंडस्ट्री के लिए बड़े मौके खुल सकते हैं। इस बिल की जरूरत अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद महसूस की गई।
यूएस बायोसेक्योर एक्ट की जरूरत क्यों पड़ी?
इन एजेंसियों ने यह पाया था कि चीन की कंपनी WuXi App Tec ने अमेरिकी क्लाइंट की संवेदनशील जानकारियां चीन की कंपनियों को उपलब्ध कराया था। पिछले कुछ सालों में आधुनिक टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को लेकर अमेरिका और चीन के बीच टकराव बढ़ा है। अमेरिकी एजेंसियों ने जिनोमिक डेटा और बायोटेक रिसर्च को लेकर चिंता जताई है। बायोसेक्योर एक्ट के कानून बन जाने के बाद फेडरल एजेंसियां'बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ऑफ कनसर्न'की तरफ से उपलब्ध कराई जा रही सेवा या बायोटेक्नोलॉजी इक्विपमेंट को खरीद नहीं सकेंगी। इसके अलावा किसी फेडरल एजेंसी से ग्रांट पाने वाली कंपनी इस फंड का इस्तेमाल'बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ऑफ कनसर्न' से इक्विपमेंट या सेवा खरीदने के लिए नहीं कर सकेगी।
इस कानून का असर किन कंपनियों पर पड़ेगा?
इस प्रस्तावित कानून का व्यापक असर'बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ऑफ कनसर्न' पर पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि फॉरेन एडवर्सरी (चीन, क्यूबा, ईरान, उत्तर कोरिया और रूस) की सरकार की तरफ से कोई कंपनी ऑपरेट करती है तो उस पर भी इसका असर पड़ेगा। खासकर इस कानून में चीन की पांच कंपनियों का उल्लेख'बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ऑफ कनसर्न' के रूप में किया गया है। इनमें BGI शामिल है, जिसे दुनिया में जेनेटिक डेटा के सबसे बड़े कलेक्टर के रूप में जाना जाता है। दूसरी कंपनी WuXi App Tecm है, जिसे अमेरिका में इस्तेमाल होने वाले एक-चौथाई दवाएं डेवलप करने वाली कंपनी के रूप में जाना जाता है।
यह भी पढ़ें: Infibeam Avenues Shares: इंफीबीम के शेयरों में 8% की भारी गिरावट, स्पिन-ऑफ के चलते मची हलचल, जानें पूरी डिटेल
किन भारतीय कंपनियों को होगा फायदा?
नए कानून के लागू होने के बाद अमेरिकी कंपनियों को 'बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ऑफ कनसर्न'के साथ अपने सभी रिश्ते जनवरी 2032 तक खत्म कर देने होंगे। इससे अमेरिकी कंपनियों को सप्लाई चेन में होने वाले बदलाव का सामना करने के लिए पूरा वक्त मिल जाएगा। इसका सबसे ज्यादा असर उन बायोटेक और फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा, जो सीधे रूप से इनोवेटर रिसर्च में शामिल हैं। अमेरिकी कंपनियां नए वेंडर्स के साथ समझौते करेंगी। इसका फायदा मॉलक्यूल विकसित करने वाली इंडियन कंपनियों को मिलेगा। इनमें Syngene, Laurus labs, Piramal Pharma और Divis Lab जैसी कंपनियां शामिल हैं।
सन फार्मा जैसी इंडियन कंपनियों को भी इस कानून से फायदा होने की उम्मीद हैं, जो पहले से अमेरिकी मार्केट में मौजूद हैं और स्पेशियलिटी ड्रग या एनएसी बनाने की कोशिश कर रही हैं। Sun Pharma के शेयर में 11 सितंबर को तेजी देखने को मिली। यह 0.64 फीसदी की तेजी के साथ 1,848 रुपये पर चल रहा था। इसके अलावा Ami Organics, Concord Biotech और Navin Fluorine को भी इससे फायदा होने की उम्मीद है।