केंद्र सरकार का वोडाफोन आइडिया में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फिलहाल कोई प्लान नहीं है। कंपनी की स्थिति बेहतर होने के संकेतों के बाद ही सरकार इस बारे में कोई फैसला लेगी। सूत्रों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी। सूत्रों ने यह भी बताया कि सरकार वोडाफोन पर रेगुलेटर के अगले 24,747 करोड़ रुपये के बकाया पर बैंक गारंटी माफ करने की गुजारिश पर भी विचार कर रही है।
कंपनी सेहत में सुधार के प्लान पर काम कर रही है
टेलीकॉम मिनिस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने बताया, "Vodafone Idea (Vi) को DoT को अपने आंतरिक संसाधन के बारे में बताना होगा और यह भी बताना होगा कि यह कितना बढ़ा है। उसे यह बताना होगा कि वह किस तरह का वित्तीय बोझ उठा सकती है। अब तक उसने फंड जुटाने के बाद अपने ऑपरेशन के बारे में कोई खास जानकारी नहीं दी है।" उन्होंने यह भी बताया कि वोडाफोन आइडिया अपनी हालत में सुधार की स्ट्रेटेजी को लागू करने की शुरुआती अवस्था में है।
सरकार की हिस्सेदारी 33 फीसदी से घटकर 23.8 फीसदी
Vodaf0ne Idea ने इस साल अप्रैल में फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) पेश किया था। इसके बाद कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी करीब 33 फीसदी से घटकर 23.8 फीसदी पर आ गई। अधिकारी ने उन खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया जताई जिनमें कहा गया था कि सरकार वोडफोन आइडिया में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए संभावित निवेशकों के साथ चर्चा कर रही है। इनमें सॉवरेन वेल्थ फंड भी शामिल हैं।
कंपनी ने निवेशकों से जुटाए थे 18000 करोड़
Vi ने अप्रैल में रिटेल और संस्थागत निवेशकों से 18,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। इससे स्टॉक 20 फीसदी से ज्यादा चढ़ा था। 27 अगस्त को वोडाफोन आइडिया का शेयर 1.9 फीसदी चढ़कर 16.09 रुपये पर बंद हुआ। एक दूसरे सीनियर अफसर ने मनीकंट्रोल को बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) ने 24,747 करोड़ रुपये की फाइनेंशियल बैंक गारंटी (FBG) माफ करने की कंपनी की गुजारिश पर अभी कोई फैसला नहीं लिया है। स्पेक्ट्रम का यह पैसा कंपनी को अगले साल सितंबर में चुकाना है। स्पेक्ट्रम नीलामी के नियमों के मुताबिक, एफबीजी का पेमेंट तय तारीख से एक साल पहले होना जरूरी है।
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हिस्सेदारी बेचने के बारे में बातचीत नहीं चल रही
वोडाफोन आइडिया के सीईओ अक्षय मूंदड़ा ने इस महीने कंपनी के नतीजों के बाद अर्निंग्स कॉल में कहा था कि सॉवरेन फंडों को हिस्सेदारी बेचने के बारे में कंपनी की सरकार के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने कहा था, "हमें इस बारे में सरकार की तरफ से कोई जानकारी नहीं मिली है। हम यह बताना चाहेंगे कि सरकार पब्लिक शेयरहोल्डर के रूप में अपने निवेश के बारे में फैसले लेने के लिए आजाद है।"