स्टॉक मार्केट में अक्टूबर की शुरुआत से ही गिरावट जारी है। छोटे-बड़े सभी तरह के स्टॉक्स अपने ऑल टाइम हाई से काफी गिर चुके हैं। सवाल है कि क्या इस गिरावट के बाद शेयरों की वैल्यूएशन सही लेवल पर आ गई है? क्या आगे मार्केट में तेजी देखने को मिलेगी? क्या अभी बैंकिंग शेयरों पर दांव लगाने से अच्छा रिटर्न मिलेगा? मनीकंट्रोल ने व्हाइटस्पेस अल्फा के पुनीत शर्मा से बातचीत में इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश की। पुनीत शर्मा को कैपिटल मार्केट का 15 साल से ज्यादा का अनुभव है।
शेयरों की वैल्यूएशन अब भी ज्यादा
शर्मा ने कहा कि यह सही है कि पिछले डेढ़ महीने में मार्केट (Stock Markets) काफी गिरा है। लेकिन, वैल्यूएशंस (Valuations) अब भी ज्यादा है। कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ में सुस्ती और इनफ्लेशन में उछाल के बावजूद अच्छी बात यह है कि इंडियन इकोनॉमी (Indian Economy) की ग्रोथ को लेकर किसी तरह की बाधा नहीं दिख रही। राजकोषीय मामले में भी स्थिति अच्छी है। मार्केट का सेंटीमेंट बदलते ही शेयरों में तेजी देखने को मिलेगी। इससे पहले थोड़े समय के लिए गिरावट जारी रह सकती है। इसके बाद वैल्यूएशन अट्रैक्टिव लेवल पर आ जाएगी।
बैंकिंग में निचले स्तर पर एंट्री के सीमित मौके
फाइनेंशियल स्टॉक्स खासकर बैंकिंग के बारे में उन्होंने कहा कि इन स्टॉक्स का प्रदर्शन मार्केट के प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले कमजोर रहा है। हाई ग्रोथ वाले सेक्टर्स के मुकाबले बैंकिंग सेक्टर का पीई अट्रैक्टिव दिख सकता है। लेकिन, यह बहुत ज्यादा कम नही है। ऐसे निवेशक जो निचले स्तर पर स्टॉक्स में एंट्री करना चाहते हैं, उनके लिए बैंकिंग में सीमित मौके हैं। इसकी वजह यह है कि बैंकिंग स्टॉक्स अपनी अर्निंग्स की संभावनाओं के मुकाबले बहुत ज्यादा अंडरवैल्यूड नहीं हैं।
अमेरिकी चुनाव नतीजों का इंडिया पर असर नहीं
अमेरिकी चुनाव के नतीजों के बारे में उन्होंने कहा कि इसका इंडिया पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि इंडियन मार्केट्स का अमेरिकी राजनीति से करीबी नाता नहीं है। जहां तक इनफ्लेशन की बात है तो हमें इसमें उछाल के बाद इंटरेस्ट रेट घटने की उम्मीद नहीं है। रुपये में भी गिरावट बढ़ने की आशंका नहीं है। इंडिया की इकोनॉमी मजबूत स्थिति में है। इसलिए विदेश में होने वाली घटनाओं का इंडियन मार्केट पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
यह भी पढ़ें: आशीष कयाल ने कहा-Nifty के 23600 से ऊपर बंद होने पर दिखेगी तेजी, Kiri Industries और Carborundum Universal में बनेगा पैसा
धीरे-धीरे बढ़ेगी कंपनियों की अर्निंग्स
शर्मा ने कहा कि इनफ्लेशन बढ़ा है। लेकिन अब भी यह उस रेंज के अंदर है, जिसे नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, इनफ्लेशन बढ़ने के बाद इंटरेस्ट रेट में कमी की उम्मीद घटी है। जहां तक इकोनॉमी की ग्रोथ के अनुमान की बात है तो हमें इसमें बड़ी कमी के आसार नहीं दिख रहे। उन्होंने कहा कि कंपनियों की अर्निंग्स में अचानक इम्प्रूवमेंट नहीं दिखेगा। स्ट्रॉन्ग फंडामेंटल्स के आधार पर इसमें धीरे-धीरे इम्प्रूवमेंट दिखेगा। इसके साथ ही धीरे-धीरे विदेशी निवेशक इंडियन मार्केट में फिर से निवेश बढ़ाना शुरू करेंगे।