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वेदांता की 'रॉयल्टी फीस' पर ED की नजर, जानिए क्यों इस पर उठा सवाल और कंपनी के लिए कितनी अहम है ये रकम

वेदांता की ब्रांड या रॉयल्टी फीस पर ED की जांच ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। यह रकम ग्रुप की होल्डिंग कंपनी वेदांता रिसोर्सेज के लिए काफी अहम है। जानिए ब्रांड फीस क्या है और कंपनी के लिए इसकी अहमियत क्यों है।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Jun 02, 2026 पर 6:56 PM
वेदांता की 'रॉयल्टी फीस' पर ED की नजर, जानिए क्यों इस पर उठा सवाल और कंपनी के लिए कितनी अहम है ये रकम
मंगलवार को वेदांता का शेयर 1.05% गिरकर 333.60 रुपये पर बंद हुआ।

अनिल अग्रवाल की मालिकाना हक वाले वेदांता ग्रुप पर एक बार फिर बाजार की नजरें टिक गई हैं। इसकी वजह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से की जा रही जांच है। मामला विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन से जुड़ा है। जांच का केंद्र वेदांता ग्रुप की वह 'ब्रांड फीस' या रॉयल्टी फीस है। यह भारत में मौजूद उसकी कंपनियां लंदन स्थित होल्डिंग कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को देती हैं।

वेदांता रिसोर्सेज के लिए यह कोई मामूली रकम नहीं है। कंपनी पर करीब 5.3 अरब डॉलर का कर्ज है। इसे चुकाने में ब्रांड फीस और भारतीय कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि इस भुगतान को लेकर शुरू हुई जांच पर निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों दोनों की नजर है।

क्या होती है ब्रांड फीस?

अगर आसान शब्दों में समझें तो ब्रांड फीस वह रकम है, जो ग्रुप की ऑपरेटिंग कंपनियां वेदांता नाम और उससे जुड़ी रणनीतिक या समूह स्तर की सेवाओं का इस्तेमाल करने के बदले चुकाती हैं।

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