अनिल अग्रवाल की मालिकाना हक वाले वेदांता ग्रुप पर एक बार फिर बाजार की नजरें टिक गई हैं। इसकी वजह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से की जा रही जांच है। मामला विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन से जुड़ा है। जांच का केंद्र वेदांता ग्रुप की वह 'ब्रांड फीस' या रॉयल्टी फीस है। यह भारत में मौजूद उसकी कंपनियां लंदन स्थित होल्डिंग कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को देती हैं।
