Women’s Day 2024: ट्रेडिंग में पुरुषों से बेहतर हैं महिलाएं, जानिए इसकी छह वजहें

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के दो रिसर्चर्स ने 1998 में एक पेपर पब्लिश किया था। इसमें यह बताया गया था कि ट्रेडिंग में पुरुषों से आगे हैं महिलाएं। बाद में भी कई स्टडी में यह बात सामने आई है। इसकी कुछ खास वजहें हैं

अपडेटेड Mar 08, 2024 पर 1:11 PM
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ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट्स ओपन करने वाली महिलाओं की संख्या साल दर साल 75 फीसदी बढ़ी है, जबकि ओवरऑल अकाउंट्स ग्रोथ 36 फीसदी रही है।

Women’s Day 2024: इंडिया में शेयरों में निवेश करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है। ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट्स ओपन करने वाली महिलाओं की संख्या साल दर साल 75 फीसदी बढ़ी है, जबकि ओवरऑल अकाउंट्स ग्रोथ 36 फीसदी रही है। यह जानकारी यस बैंक के आंकड़ों पर आधारित है। रिसर्च स्टडीज से यह पता चला है कि ट्रेडिंग के मामले में महिलाएं पुरुषों से आगे हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि उनमें अति आत्मविश्वास नहीं होता है। महिला इनवेस्टर्स की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि शेयरों में निवेश से वे अच्छी कमाई कर रही हैं। कोरोना की महामारी शुरू होने पर महिलाओं की दिलचस्पी शेयरों में निवेश में बढ़ी थी। तब से यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

ट्रेडिंग में महिलाओं के पुरुषों से बेहतर होने की ये छह वजहें हैं:

1. महिलाओं में अति आत्मविश्वास नहीं

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के रिसर्चर्स ब्रैड एम बारबर और टेरांस ओडियन ने 1998 में एक पेपर पब्लिश किया था। इसमें ट्रेडिंग में ओवरकॉन्फिडेंस के असर के बारे में बताया गया था। हालांकि, यह पेपर करीब 26 साल पहले आया था। लेकिन, आज भी इसे भरोसेमंद माना जाता है। मनीकंट्रोल क्रिएटर इकोनॉमी समिट 2023 में सेबी के होल टाइम मेंबर अनंत नारायण ने कहा था, "महिलाएं इसलिए बेहतर इनवेस्टर होती हैं क्योंकि स्वभाव से उनमें अति आत्मविश्वास नहीं होता।" रिसर्च पेपर में यह बताया गया है कि ज्यादा आत्मविश्वास वाले इनवेस्टर्स अपनी क्षमता का गलत अंदाजा लगाते हैं।


2. महिलाएं बहुत ज्यादा ट्रेड नहीं करतीं

रिसर्च में यह भी पाया गया कि पुरुष महिलाओं के मुकाबले ज्यादा ट्रेड करते हैं। महिलाओं के मुकाबले पुरुषों का टर्नओवर रेट 1.5 गुना था। एक साल में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों का रिटर्न 0.94 फीसदी कम था। रिसर्च के मुताबिक, सिंगल महिला के मुकाबले सिंगल पुरुष ने 67 फीसदी ज्यादा ट्रेड किया। सिंगल महिला के मुकाबले सिंगल पुरुष का रिटर्न एक साल में 1.44 फीसदी कम था।

3. महिलाएं कई रिस्क नहीं लेती हैं

रिसर्च के नतीजों में यह पाया गया कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं कम रिस्क लेती हैं। महिलाओं के मुकाबले पुरुष ज्यादा रिस्की पॉजिशन लेते हैं। कैपिटल डॉट कॉम की एक स्टडी 2022 में आई थी। इसमें बताया गया था कि महिला ट्रेडर्स बड़े स्टॉपलॉस लगाती हैं और उसके हिट करने पर ट्रेड से एग्जिट कर जाती हैं। पुरुष कम स्टॉपलॉस लगाते हैं और ट्रेड अनुमान के उलट रहने पर उसे कैंसल करते हैं।

4. महिलाओं में लॉस को बर्दाश्त करने की क्षमता

करीब चार दशकों का स्टॉक मार्केट का अनुभव रखने वाली ज्योति बुधिया का कहना है कि महिला इसलिए बेहतर ट्रेडर होती हैं, क्योंकि लॉस को वे अच्छी तरह से संभाल लेती हैं। लॉस होने पर उन्हें दुख होता है, लेकिन वे जल्दबाजी में फैसले नहीं लेती हैं। इसके उलट पुरुष लॉस होने पर उसकी भरपाई करने की कोशिश करते हैं। वे बड़ी पूंजी के साथ मार्केट पर दांव लगाते हैं। लॉस होने पर वे अपना दांव बढ़ा देते हैं।

5. महिलाएं उधार के पैसे से इनवेस्ट नहीं करती

महिलाएं उधार के पैसे से ट्रेड करना पसंद नहीं करतीं। बुधिया ने कहा, "हर 10 में से 6 या 7 पुरुष ट्रेड के लिए उधार लेते हैं। उधर, हर 10 महिला में से सिर्फ एक या दो उधार के पैसे से ट्रेड करती हैं।" उन्होंने कहा कि रिस्क मैनेजमेंट के मामले में भी महिलाएं पुरुषों के मुकाबले बेहतर हैं, क्योंकि उन्हें कम पैसे में काम चलाना आता है।

6. महिलाएं नहीं सोचती कि उनके पास असीमित समय है

बुधिया ने कहा कि महिलाओं को इस बात का अहसास होता है कि उनके पास क्या है और कितना है। उन्होंने कहा, "आप किसी पुरुष से पूछिए कि ट्रेड के लिए उसके पास कितना समय है। वह कहेगा कि वह तब तक ट्रेड कर सकता है जब तक वह जीवित है। दूसरी तरफ महिला से यह सवाल पूछने पर कुछ साल या महीने बता सकती है।"

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