इंटरनेशनल ब्रोकरेज फर्म CLSA के इंडिया हेड विकास जैन का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार में मौजूदा करेक्शन के बावजूद लॉन्ग टर्म ग्रोथ की संभावनाएं बरकरार हैं। CLSA के इंडिया फोरम के मौके पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, 'मैं लॉन्ग टर्म संभावनाओं को लेकर काफी बुलिश हूं। बेहद शॉर्ट टर्म को लेकर भी मैं बुलिश हूं। हालांकि, मैं अभी चल रहे मौजूदा करेक्शन को लेकर चिंतित हूं।'
जैन ने कहा कि कुछ अन्य बाजारों के उलट भारत की अर्निंग ग्रोथ में निरंतरता बनी हुई है, जबकि इन बाजारों में लो बेस पर ग्रोथ देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा, ' अगर आप पिछले कुछ साल का रिकॉर्ड देखें, तो कोरिया, दक्षिण अफ्रीका, ताइवान- इन सभी देशों की बड़ी अर्निंग ग्रोथ लो बेस पर हुई है, जबकि भारत में निरंतरता रही है।'
उनका कहना था कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी आबादी है। जैन ने कहा, ' कितने देशों की कामकाजी उम्र वाली आबादी में बढ़ोतरी हो रही है? सिर्फ दक्षिण अफ्रीका, फिलिपींस, भारत और मेक्सिको में ऐसा है। बाकी सभी देशों की कामकाजी उम्र वाली आबादी में गिरावट देखने को मिल रही है।' आबादी में इस बढ़ोतरी, अर्निंग ग्रोथ में निरंतरता और मैक्रो-इकोनोमिक फैक्टर्स अनुकूल रहने की वजह से अगले दशक में भारत की ग्रोथ के लिए मजबूत बुनियाद तैयार हो सकती है। उन्होंने कहा, 'ये वाकई में भारत को कई साल तक आगे बढ़ाने में मददगार साबित होंगे।'
जैन का यह भी कहना था कि भारत 'माइक्रो खामोशी' के दौर में प्रवेश कर रहा है, जिससे ग्रोथ को मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा, ' अगले साल के अंत में बिहार में चुनाव है और फरवरी में दिल्ली में चुनाव है, जो अहम घटनाक्रम नहीं है। इस वजह से सरकार के पास आर्थिक गतिविधियों पर फोकस करने के लिए ज्यादा गुंजाइश होगी।' मॉनिटरी पॉलिसी मोर्चे पर रिजर्व बैंक के रुख पर भी नजर होगी। उन्होंने कहा, ' अगर रिजर्व बैंक ब्याज दर में कटौती की शुरुआत करता है, तो यह पॉजिटिव कदम होगा। इससे भी ग्रोथ को सहारा मिलेगा।'