ट्रेड खरीदने के लिए वोलैटिलिटी इंडेक्स का इस्तेमाल स्टॉपलॉस की तरह किया जा सकता है

लगातार गिरावट के बाद शेयरों की कीमते अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई हैं। यह मार्केट में खरीदारी का अच्छा मौका है चैलेंज यह तय करने का है कि अगर आप खरीदारी कर रहे हैं तो आपको अपनी खरीदारी कब रोक देनी चाहिए

अपडेटेड Feb 15, 2025 पर 12:45 PM
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एंप्लॉयड वोलैटिलिटी (IV) का अंडरलाइंग स्टॉक या इंडेक्स से विपरीत संबंध होता है

इंडियन स्टॉक मार्केट्स में पिछले कई सालों में बड़ा करेक्शन नहीं आया था। इस बार बाजार के प्रमुख सूचकांक पीक से 15-20 फीसदी तक गिरे हैं। यह मार्केट में खरीदारी का अच्छा मौका है, लेकिन यह चैलेंज पेश करता है। चैलेंज यह है कि अगर आप खरीदारी कर रहे हैं तो आपको अपनी खरीदारी कब रोक देनी चाहिए। मेरा मानना है कि हम शुरुआती संकेत समझने के लिए वोलैटिलिटी की मदद ले सकते हैं। लेकिन, ऐसा करने से पहले हमें इक्विटी और वोलैटिलिटी की बुनियादी विशेषताओं को रिवाइज कर लेना ठीक रहेगा।

वोलैटिलिटी के लिए हम ऑप्शंस के प्रीमियम की एंप्लॉयड वोलैटिलिटी की बात कर रहे हैं। यह ऐसा फिगर है, जिसका कैलकुलेशन गणित के फॉर्मूले की मदद से किया जाता है। किसी को यह कैलकुलेशन करने की जरूरत नहीं है क्योंकि कई ऑप्शंस एनालिटिक्स अप्लिकेशंस के पास पहले से यह जानकारी उपलब्ध है। यह जानकारी एक्सचेंजों की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है, जहां इन ऑप्शंस में ट्रेड होता है।

एंप्लॉयड वोलैटिलिटी (IV) की दो बुनियादी विशेषताएं हैं:


1. इसका स्वभाव सीमित दायरे में रहने का है

2. इसका अंडरलाइंग स्टॉक या इंडेक्स से विपरीत संबंध होता है

पहला पूरी तरह से स्ट्रेटफॉरवर्ड ऑब्जर्वेशन है। दूसरी विशेषता के पीछे कुछ लॉजिक है। लॉजिक यह है कि अगर कोई स्टॉक या इंडेक्स अपने मोमेंटम या वोलैटिलिटी के साथ तेजी से गिरता है तो तेजी की स्थिति में उसी स्टॉक या इंडेक्स के चढ़ने की रफ्तार सुस्त होगी। इसके पीछे की वजह यह है कि कंस्ट्रक्टिव मूव में हमेशा समय लगता है, लेकिन किसी चीज के गिरने की रफ्तार हमेशा तेज होती है। यह किसी एसेट क्लास का स्वभाव होता है।

जब हम पहली और दूसरी विशेषता को एक साथ देखते हैं तो हमें ट्रेडिंग सिस्टम मिलता है। अब जब कभी IV लोअर प्वाइंट पर होता है तो हम इसके ऊपर जाने की उम्मीद करते हैं। IV के ऊपर जाने पर अंडरलाइंग के प्राइस नीचे जाने की उम्मीद की जा सकती है। हम इसी का इस्तेमाल IV के चढ़ने की उम्मीद के ऑब्जर्वेशन के लिए करते हैं। इससे हम बाय के ट्रेड में स्टॉपलॉस लगा सकते हैं।

मैं इसे निफ्टी इंडेक्स के उदाहरण के साथ समझा सकता हूं। हालांकि इसे स्टॉक्स के साथ उसके संबंधित आईवी चार्ट के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। निफ्टी के लिए प्रॉक्सी आईवी के तौर पर हम इंडिया वीआईएक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह कई वेबसाइट्स पर चार्ट के रूप में उपलब्ध है।

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1. पिछले छह महीने को लोएस्ट प्वाइंट मार्क कर लें।

2. लोएस्ट प्वाइंट + इंडिया वीआएक्स की 10 फीसदी को लेकर सतर्क रहे।

3. इंडिया वीआएक्स के स्टेप 2 डे के अलर्ट पर इंक्रिमेंट डे के करीब आने का इंतजार करें।

यह समय एक्ट करने का है। अगर आप एग्जिट नहीं करना चाहते तो अपने स्टॉपलॉस को कम रखें। आप इसे इतना कम रख सकते हैं जितना संभव हो सके।

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