कोरोना वायरस महामारी (Corona virus) के कारण देश में फंसे हुए हुए नॉन रेजिडेंट इंडियन (NRIs) को सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने डबल टैक्सेशन से राहत दी है। कोरोना की वजह से करीब एक साल से भारत में रह रहे NRIs को डबल टैक्स नहीं देना होगा, यानी उन्हें भारत में इनकम टैक्स नहीं भरना होगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने कहा कि तय अवधि से ज्यादा भारत में रुकने वाले NRIs को 31 मार्च, 2021 तक कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा।

CBDT की ओर से जारी एक सर्कुलर में कहा गया है कि जो लोग वित्त वर्ष 2020 में विदेश से भारत आए और कोविड-19 के कारण लगे लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंध के कारण वापस नहीं जा पाए, ऐसे किसी व्यक्ति को अगर डबल टैक्सेशन एवॉयडेंस एग्रीमेंट (Double Taxation Avoidance Agreement) के बावजूद डबल टैक्सेशन का सामना करना पड़ रहा है तो वे 31 मार्च तक प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इसकी जानकारी दें और अपनी स्थिति स्पष्ट करें।

CBDT ने सर्कुलर में कहा कि वह डबल टैक्सेशन की संभावित स्थितियों को समझने के बाद इस बात की जांच करेगा कि इस मामले में छूट देने की आवश्यकता है या नहीं। अगर जरूरी हुआ तो ऐसे NRIs को टैक्स में छूट दी जाएगी। पिछले साल मार्च में लॉकडाउन की वजह से बहुत से प्रवासी भारतीय भारत में ही फंस गए और इसके बाद करीब एक साल से अपने कामकाज के देश नहीं जा पाए। ऐसे लोगों के सामने काफी मुश्किल आने वाली थी, क्योंकि उन्हें दो देशों में इनकम टैक्स देना होता।

क्या है डबल टैक्सेशन का नियम

वर्तमान नियम के मुताबिक अगर कोई नॉन रेसिडेंट इंडियन भारत में 182 या उससे ज्यादा दिनों के लिए रहता है तो उसे अपनी ग्लोबल इनकम पर भारत में टैक्स चुकाना होगा। फाइनेंस बिल 2020 में नॉन रेसिडेंट इंडियन पर टैक्स को लेकर नियम में बदलाव किया गया था। अब 182 दिनों की अनिवार्यता को घटाकर 120 दिन कर दिया गया है।

इस वजह से वित्त वर्ष 2020-21 में अगर कोई नॉन रेसिडेंट इंडियन (Visiting NRI) 120 दिनों से ज्यादा देश में रहता है और उसकी इंडियन टैक्सेबल इनकम 15 लाख तक है तो उसे कोई टैक्स नहीं भरना होगा। 181 दिनों तक के स्टे पर भी उसका स्टेटस NRI बना रहेगा। लेकिन  अगर उसकी कमाई 15 लाख से ज्यादा होगी तो 120 दिन भारत में रहने पर उसका स्टेटस इंडियन रेसिडेंट हो जाएगा और उससे टैक्स वसूली होगी।

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