भारतीय शेयर बाजार पिछले कई महीनों से एक सीमित दायरे में घूम रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी ने पिछले साल 26 सितंबर को अपना रिकॉर्ड ऑलटाइम हाई छुआ था। तब से करीब एक साल हो गए हैं और दोनों इंडेक्स अभी इस स्तर के नीचे बने हुए हैं। शेयर बाजार की इस अंडरपरफॉर्मेंस के पीछे सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली मानी जा रही है। ऐसे में सभी की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि आखिर ये विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर कब तक भारतीय शेयर बाजार में लौटेंगे? इन अटकलों के पीछे कुछ वजहें भी है। भारत ने हाल ही में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कुछ बड़े कदम उठाए हैं। सबसे पहले इनकम टैक्स स्लैब में छूट की सीमा को बढ़ाकर 12 लाख किया गया। और अब सरकार ने जीएसटी दरों में व्यापक सुधारों को भी लागू कर दिया है। लेकिन इसके बावजूद अभी तक विदेशी निवेशकों की वापसी का कोई बड़ा संकेत मिलता नहीं दिख रहा है। ऐसा क्यों? जेपी मॉर्गन के एशिया हेड और ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट इक्विटी स्ट्रैटजी के को-हेड, राजीव बत्रा ने इसके पीछे 3 वजहें बताईं। बत्रा ने बताया कि विदेशी निवेशक भारत लौटने के लिए तैयार हैं, लेकिन इससे पहले ये इन चीजों के होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ये तीनों कारण क्या हैं? आइए जानते हैं