BRICS Summit 2024: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने बुधवार (23 अक्टूबर) को रूस में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर पांच साल बाद द्विपक्षीय बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच यह वार्ता मई 2020 में पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद उत्पन्न होने के बाद भारत-चीन के बीच शीर्ष स्तर पर पहली औपचारिक बैठक है। वहीं, पांच साल में यह पहली बार है जब दोनों नेताओं ने औपचारिक बैठक की। चीनी राष्ट्रपति शी ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के दौरान भारत के साथ संवाद मजबूत करने का आह्वान किया। सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि दोनों नेताओं के बीच 45 मिनट से अधिक समय तक चर्चा हुई।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति से मीटिंग के दौरान कहा, "आपसे मिलकर खुशी हुई। जैसा कि आपने कहा, यह पांच साल बाद हमारी पहली औपचारिक बैठक है। हमारा मानना है कि भारत और चीन के संबंधों का महत्व केवल हमारे लोगों के लिए ही नहीं है लेकिन वैश्विक शांति-स्थिरता और प्रगृति के लिए भी हमारे संबंध बहुत अहम हैं।" वहीं, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों पक्षों के लिए अधिक संवाद करना महत्वपूर्ण है।
चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने X पर लिखा, "कजान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। भारत-चीन संबंध हमारे देशों के लोगों और क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता द्विपक्षीय संबंधों का मार्गदर्शन करेगी।"
पांच साल बाद हुई औपचारिक मुलाकात
पिछली बार दोनों नेता अक्टूबर 2019 में ममल्लापुरम में 7वीं शताब्दी के पंच रथ स्मारक की पृष्ठभूमि में मिले थे। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले ही भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी सेनाओं द्वारा गश्त करने के समझौते पर सहमति जताई थी।
यह समझौता चार साल से चल रहे गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में इसे एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग ने मंगलवार (22 अक्टूबर) रात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा सभी ब्रिक्स नेताओं और शिखर सम्मेलन में उपस्थित लोगों के लिए आयोजित औपचारिक रात्रिभोज में मुलाकात की।
नवंबर 2022 में पीएम मोदी और शी ने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति द्वारा G-20 नेताओं के लिए आयोजित रात्रिभोज में एक-दूसरे का अभिवादन किया और अनौपचारिक संक्षिप्त बातचीत की थी। पिछले वर्ष अगस्त में भी भारतीय प्रधानमंत्री और चीनी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स (ब्राजील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन के दौरान जोहानिसबर्ग में एक संक्षिप्त और अनौपचारिक बातचीत की थी।
इस सप्ताह की शुरुआत में विदेश सचिव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की थी कि 2020 में उठे मुद्दों के हल के लिए और तनाव कम करने के लिए दोनों देशों में समझौता हो गया है। पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच बैठक कजान में होगी, जो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का स्थल है।
चीन ने भी समझौते की पुष्टि
चीन ने पूर्वी लद्दाख में उसकी और भारत की सेनाओं के बीच गतिरोध समाप्त करने के लिए नई दिल्ली के साथ एक समझौता होने की मंगलवार को पुष्टि की। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, "हाल के समय में भारत और चीन दोनों देशों की सीमा से संबंधित मुद्दों पर राजनयिक और सैन्य माध्यमों के जरिए निकट संपर्क में रहे हैं।" लिन से चार वर्ष से अधिक समय से जारी सैन्य गतिरोध को समाप्त करने के लिए एक समझौता करने की सोमवार को भारत द्वारा की गई घोषणा को लेकर प्रतिक्रिया मांगी गई थी। उन्होंने कहा कि अब दोनों पक्ष प्रासंगिक मामलों पर एक समाधान पर पहुंच गए हैं।
लिन ने कहा कि चीन इसे लागू करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा। लेकिन उन्होंने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया। अधिक डिटेल्स मुहैया कराने के लिए जोर देने पर, लिन ने कहा, "मैंने उस सवाल का जवाब दे दिया है और मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है।"
भारत ने सोमवार को घोषणा की थी कि भारतीय और चीनी वार्ताकार पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त के लिए एक समझौते पर सहमत हुए हैं। इस समझौते को पूर्वी लद्दाख में चार वर्ष से अधिक समय से जारी सैन्य गतिरोध के समाधान की दिशा में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इस पर चीन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
जून 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंध निचले स्तर पर पहुंच गए थे। यह झड़प पिछले कुछ दशकों में दोनों पक्षों के बीच हुई सबसे भीषण सैन्य झड़प थी।