Israel-Iran Conflict: इजराइल और ईरान की लड़ाई दुनिया और इंडिया के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है?

अगर इजराइल और ईरान की लड़ाई का दायरा बढ़ता है तो समुद्री रास्तों से मालों की आवाजाही में बाधा आ सकती है। इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। ऑयल की ढुलाई के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बहुत अहम है। इसके रास्ते रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल की ढुलाई होती है

अपडेटेड Oct 03, 2024 पर 4:54 PM
अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अपने कब्जे में लेने की कोशिश करता है तो इसके गंभीर नतीजे होंगे।

इजराइल और ईरान के बीच टेंशन ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने 1 अक्टूबर की रात इजराइल पर मिसाइल हमलों के बाद कह दिया है कि उसकी कार्रवाई पूरी हो गई है। लेकिन, स्टॉक मार्केट्स को ईरान पर इजराइल के जवाबी हमले की चिंता सता रही है। क्रूड ऑयल की कीमत उछलकर 74 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। लेकिन, इसे बहुत ज्यादा नहीं कहा जा सकता। इससे यह भी संकेत मिलता है कि मार्केट्स को अब मिडिलईस्ट में बढ़ते तनाव की ज्यादा चिंता नहीं रह गई है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि मध्यपूर्व में तनाव करीब एक साल से चल रहा है। सवाल है कि यह क्राइसिस आगे क्या रूप लेगा?

दो तरह की स्थितियां बन सकती हैं

मुख्य रूप से दो बड़ी स्थितियां आगे बन सकती हैं। पहला, इजराइल की तरफ से संयम देखने को मिल सकता है और स्थिति काबू में बनी रह सकती है। दूसरा, चिंगारी बड़ा दावानल बन सकती है और इसमें दूसरे देश कूद सकते हैं। इस साल अप्रैल में ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले के जवाब में इजराइल ने नियंत्रित कार्रवाई की थी। उसने एक एयरबेस को निशाना बनाया था। इस बार भी वह इसी तरह की कार्रवाई कर सकता है और ईरान में उस जगह को निशाना बना सकता है, जहां से मिसाइलें दागी गई थीं। ऐसा होने पर ऑयल की कीमतों में हल्की तेजी आ सकती है।


इजराइल ने परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया तो गंभीर नतीजे

इससे गोल्ड की कीमतों में उछाल दिख सकता है, जबकि अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में हल्की गिरावट आ सकती है। ऐसा होने पर दुनिया के शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट नहीं आएगी। थोड़े समय के लिए उतारचढ़ाव दिख सकता है। अमेरिका की कोशिश इजराइल को बड़े हमले नहीं करने के लिए मनाने की होगी। लेकिन, अगर इजराइल ईरान में परमाणु ठिकानों को निशाना बनाता है तो इससे ऑयल की कीमतें उछल सकती हैं।

अंतराष्ट्रीय व्यापार में आ सकती है रुकावट

दुनिया में 80 फीसदी से ज्यादा व्यापार समुद्र के रास्ते होता है। अगर समुद्री रास्तों से मालों की आवाजाही में बाधा आती है तो इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। ऑयल की ढुलाई के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बहुत अहम है। इसके रास्ते रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल की ढुलाई होती है। सऊदी अरब, इराक, ईरान, यूएई, कुवैत और कतर इस रास्ते ऑयल का एक्सपोर्ट करते हैं। पहले भी मध्यपूर्व में तनाव बढ़ने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फोकस में रहा है।

ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को कब्जे में ले सकता है

अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अपने कब्जे में लेने की कोशिश करता है तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के करीब स्थित है। हालांकि, इसकी संभावना कम है, क्योंकि एक तो यह ईरान के हित में नहीं होगा और दूसरा इस पर दुनियाभर में प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी। लेकिन, इस संभावना की पूरी तरह से अनदेखी नहीं की जा सकती। पहले लाल सागर में हूती विद्रोहियों की तरफ से इस तरह की बाधा पैदा की जा चुकी है। अब भी समुद्री जहाज लाल सागर रास्ते का इस्तेमाल करने से बचते हैं। ऐसे में अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता बंद होता है तो तेल के एक्सपोर्ट के लिए दूसरा कोई विकल्प नहीं होगा।

ऑयल 100 डॉलर जाने पर होगी मुश्किल

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। ऐसे में इंडिया और दूसरे शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। तब गोल्ड और अमेरिकी बॉन्ड की कीमतें बढ़ जाएगी, क्योंकि लोग सुरक्षित विकल्पों में निवेश करना चाहेंगे। अगर दूसरे देश इस जंग में शामिल होते हैं तो नतीजें खतरनाक होंगे। यह 1973 की Yom Kippur की लड़ाई जैसा हो सकता है।

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इंडिया पर भी पड़ेगा असर

ऑयल की कीमतों में उछाल का ज्यादा असर इंडिया पर पड़ेगा। इससे करेंट अकाउंट डेफिसिट, इनफ्लेशन और फिस्कल डेफिसिट बढ़ सकता है। हालांकि, सरकार पर ऑयल की कीमतों में उछाल का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह इसका बोझ ग्राहकों पर डाल देगी। अगर वह ऐसा नहीं करती है तो उस पर वित्तीय बढ़ सकता है। हालांकि, इंडियन इकोनॉमी आज अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है। विदेशी मुद्रा भंडार 20 सितंबर को 692 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। करेंट अकाउंट डेफिसिट पहली तिमाही में जीडीपी का 1.1 फीसदी था। विदेशी कर्ज FY24 में जीडीपी का 18.7 फीसदी था।

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