ईरान ने जब इजरायल पर मिसाइल दागी, उसके बाद ही इजरायल ने ईरान को चेतावनी दे डाली कि वह इसका बदला लेगा। अमेरिका शुरू से ही इजरायल को सपोर्ट कर रहा है। लेकिन अमेरिका ने कहा है कि अगर इजरायल, ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बनाता है तो वे इजरायल को इसमें सपोर्ट नहीं करेंगे। कुल मिलाकर ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव में अमेरिका भी कूद गया है। मिडिल ईस्ट के दोनों देशों के बीच पैदा होते जंग जैसे हालात में ब्रिटेन और भारत भी सीन में नजर आने लगे हैं। हालांकि भारत के रुख पर भी पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई हैं।
अमेरिका और ब्रिटेन ने इजरायल-इरान वार में आग में घी डालने का काम किया है। लपटें इसकी तेज उठ सकती हैं। शायद यही वजह है कि अमेरिका ने बड़ी संख्या में अपनी सेना तैनात कर दी है। इधर ब्रिटेन ने भी अपनी फौज झोंक दी है। इस बीच भारत आखिर कहां पीछे रहने वाला है। भारत ने भी ईरान पोर्ट पर अपने जहाज खड़े कर दिए हैं।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ब्रिटेन ने झोंक दी सेना
मौजूदा समय में अमेरिका के मिडिल ईस्ट में 40,000 से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने आदेश दिया है कि वो मिडिल ईस्ट में कुल 43,000 सैनिक तैनात करेगा। बात साफ है कि अमेरिका ने अपनी सेना की तैनाती बढ़ा दी है। हालांकि अमेरिका इजरायल के साथ खड़े होने का ऐलान किया है। इजरायल के ऊपर जिसने भी हमला किया, इजरायल का इतिहास रहा है कि उसने कभी छोड़ा नहीं है। इजरायल ने ईरान को चेतावनी भी दी है। ऐसे में आशंका यही जताई जा रही है कि इजरायल और ईरान के बीच महासंग्राम छिड़ने वाला है। आमतौर पर मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 30,000 से ज्यादा सैनिक तैनात रहते हैं। गाजा-इजरायल हमले के दौरान अमेरिकी सेना की संख्या 50,000 पहुंच गई थी।
इजरायल के खेमे में ब्रिटेन भी शामिल
ब्रिटेन भी इस जंग में अछूता नजर नहीं आ रहा है। उसने भी मिडिल ईस्ट में अपने सैनिकों के बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। ब्रिटेन ने पिछले कुछ दिनों में 700 अतिरिक्त सैनिक वेस्ट एशिया में भेजे हैं। इजरायल के साथ ब्रिटेन खड़ा नजर आ रहा है।
इंडियन नेवी के जहाज ईरान पोर्ट पर खड़े
इधर भारत की दोस्ती इजरायल और ईरान दोनों से है। इस बीच इंडियन नेवी के तीन जहाज ईरान पोर्ट पर खड़े हैं। ये जहाज फारस की खाड़ी में ट्रेनिंग मिशन के तहत भेजे गए हैं। इनमें भारतीय नौसैनिक जहाज- आईएनएस शार्दुल, आईएनएस तीर और आईसीजीएस वीरा ईरान के बंदर अब्बास पहुंच गए हैं। भारत के इन नेवी शिप का स्वागत ईरानी नौसेना के जहाज़ ज़ेरेह ने किया। यह कदम भारत और ईरान के बीच बढ़ते नौसैनिक सहयोग के लिए हो रहा है।
अब बड़ा सवाल ये है कि क्या इजरायल का अगला निशाना ईरान होगा ? अगर ऐसा होता है तो इसका अंजाम पूरी दुनिया के लिए कितना विनाशकारी हो सकता है। जानकारों का मानना है कि ईरान और इजरायल के बीच अगर संघर्ष को जल्द खत्म नहीं हुआ तो इसका असर आसपास के देशों पर भी पड़ सकता है। कुछ देश ईरान के समर्थन में जा सकते हैं तो कुछ इजरायल के समर्थन में जा सकते हैं। जिससे एक बड़ा क्षेत्रीय युद्ध खड़ा हो सकता है। इस युद्ध में अरब के अन्य देश भी जुड़ सकते हैं। इससे इंटरनेशनल लेवल पर कच्चे तेल के दाम में आग लग सकती है।