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Nobel Peace Prize 2024: जापानी संगठन 'निहोन हिडानक्यो' को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, जानिए संगठन का काम

Nobel Peace Prize 2024: जापानी संगठन 'निहोन हिडानक्यो' को साल 2024 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला है। पिछले साल ईरानी पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था। उन्हें डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर के उप निदेशक के रूप में उनके काम के लिए जाना जाता है

Jitendra Singhअपडेटेड Oct 11, 2024 पर 4:16 PM
Nobel Peace Prize 2024: जापानी संगठन 'निहोन हिडानक्यो' को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, जानिए संगठन का काम
Nobel Peace Prize 2024: नोबेल शांति पुरस्कार 2024 के विजेता का ऐलान हो गया है।

साल 2024 के लिए नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान हो गया है। जापानी संगठन निहोन हिडानक्यो को मिला है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने कहा कि संगठन को ये पुरस्कार परमाणु हथियारों के खिलाफ लंबी मुहिम चलाने के लिए दिया जा रहा है।  नॉर्वेजियन नोबेल समिति को इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कुल 286 लोगों ने अप्लाई किया था। जिसमें से 89 संगठन हैं। पिछली बार यानी साल 2023 में ईरानी पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था।

जापानी संगठन निहोन हिडानक्यो हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले में बचे लोगों की देखभाल काम करता है। बम से बचे लोगों के जमीनी स्तर के आंदोलन को हिबाकुशा के नाम से भी जाना जाता है। जापान का यह संगठन इस बात को ध्यान में रखते हुए काम कर रहा है कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल दोबारा कभी नहीं किया जाना चाहिए।

निहोन हिडानक्यो का गठन कब हुआ था?

बता दें कि जापानी संगठन निहोन हिडानक्यो गठन साल 1956 हुआ था। इसका मकसद परमाणु हथियारों से होने वाले नुकसान को लेकर दुनिया भर में जगरूकता फैलाना है। नोबेल समिति ने परमाणु हथियारों के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर निहोन हिडानक्यो की तारीफ भी की है। अगले साल हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के 80 साल पूरे हो जाएंगे। जिसमें करीब 1.20 लाख लोगों की मौत हो गई थी। उसके बाद के कुछ सालों तक हजारों लोग चोटों और रेडिएशन के संपर्क में आने की वजह से काल के गाल में समा गए थे। नोबेल समिति ने कहा कि इस साल नोबेल शांति पुरस्कार निहोन हिडांक्यो को देते हुए हम उन सभी जीवित बचे लोगों को सम्मानित करना चाहते हैं। जिन्होंने दर्दनाक यादों के बावजूद शांति का विकल्प चुना है।

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