क्या रूबल के कमजोर होने से डेंजर जोन में पहुंच गई है रूस की इकनॉमी?

रूस की मुद्रा रूबल में हाल के महीनों में काफी कमजोरी देखने को मिली है। इस मुद्रा में लगातार दर्ज की की जा रही कमजोरी को रोकने के लिए रूस के केंद्रीय बैंक को हस्तक्षेप करना पड़ा है। हालांकि, हाल तक सरकार इस मामले में दखल नहीं दे रही थी, क्योंकि रूबल में कमजोरी से उसके बजट को मदद मिल रही थी। हालांकि, इस मुद्रा के ज्यादा कमजोर होने से रूस में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया था, लिहाजा सरकार को आगे आने पड़ा

अपडेटेड Aug 15, 2023 पर 10:31 PM
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रूबल इस साल डॉलर के मुकाबले करीब 30 पर्सेंट कमजोरी हुआ है।

हाल के महीनों में रूस की मुद्रा रूबल में डॉलर के मुकाबले काफी कमजोरी देखने को मिली है। इस मुद्रा में लगातार दर्ज की की जा रही कमजोरी को रोकने के लिए रूस के केंद्रीय बैंक को हस्तक्षेप करना पड़ा है। हाल तक सरकार इस मामले में दखल नहीं दे रही थी, क्योंकि रूबल में कमजोरी से उसके बजट को मदद मिल रही थी। हालांकि, इस मुद्रा के कमजोर होने से रूस में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया था, लिहाजा सरकार को आगे आने पड़ा।

यहां रूबल से जुड़ी अहम चीजों के बारे में जानकारी दी जा रही है:

क्यों कमजोर हो रहा है रूबल?

इसमें रूस के इकनॉमिक फंडामेंट्ल्स का भी योगदान है, लेकिन यही एकमात्र वजह नहीं है। रूस के एक्सपोर्ट में गिरावट है। मुख्य तौर पर ऑयल और नैचुरल गैस से उसका रेवेन्यू कम हो गया है। इसके अलावा, उसका इंपोर्ट बढ़ गया है। दरअसल, जब रूस में सामानों का इंपोर्ट होता है, तो इसके लिए डॉलर या यूरो जैसी फॉरेन करेंसी का इंतजाम करने के लिए रूस को रूबल बेचना पड़ता है। इससे एक्सचेंज रेट में रूबल के रेट कम हो जाते हैं। रूस का ट्रेड सरप्लस कम हो गया है, जिसका असर रूबल पर देखने को मिल रहा है।


केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में क्यों बढ़ोतरी की?

ब्याज दरों में बढ़ोतरी की सबसे प्रमुख वजह इनफ्लेशन की चुनौती से निपटना है। रूबल के कमजोर होने से इनफ्लेशन की स्थिति और खराब हो जाएगी, क्योंकि रूस की करेंसी में इंपोर्ट महंगा हो जाएगा। रूबल की कमजोरी का असर कीमतों पर दिख रहा है। पिछले तीन महीनों में इनफ्लेशन 7.6% से भी ज्यादा हो गया है, जबकि रूस के केंद्रीय बैंक ने इसके लिए 4 पर्सेंट का लक्ष्य तय किया है। ब्याज दर ऊंची रहने से लोन लेना महंगा हो जाएगा और इंपोर्ट समेत घरेलू समानों की मांग सीमित हो जाएगी। लिहाजा, इनफ्लेशन कम करने के लिए केंद्रीय बैंक रूस की घरेलू अर्थव्यवस्था को नियंत्रित कर रहा है।

क्या इसका मतलब यह है कि पाबंदियां प्रभावी हैं?

इसका जवाब हां और नहीं, दोनों है। एक्सपोर्ट में इसलिए गिरावट है, क्योंकि पश्चिमी गठबंधन वाले देशों ने रूस के तेल का बहिष्कार कर रखा है। बहिष्कार की वजह से रूस को डिस्काउंट पर तेल बेचना पड़ा है और कई घोस्ट टैंकर भी खरीदने के लिए उसे बड़ी रकम खर्च करनी पड़ी है। इसके अलावा, रूस ने यूरोप को सप्लाई किए जाने वाले नेचुरल गैस में भी कटौती की है। यूरोप, नेचुरल गैस के मामले में रूस का सबसे बड़ा ग्राहक है। हालांकि, इंपोर्ट में रिकवरी से साफ है कि रूस प्रतिबंध और बहिष्कार से निपटने का रास्ता तलाश रहा है।

क्या रूस में आर्थिक संकट है?

एक्सपर्ट्स की राय में ऐसा नहीं है। मैक्रो एडवाइजरी पार्टनर्स के सीईओ क्रिस वीफर (Chris Weafer) ने बताया, 'कमजोर रूबल काफी हद तक पाबंदियों का नतीजा है, लेकिन यह संभावित आर्थिक संकट की तरफ इशारा नहीं करता।' उनके मुताबिक, कमजोर रूबल ने कई तरह से सरकारी की मदद भी की है। लोअर एक्सचेंज रेट का मतलब है कि उसे ऑयल और अन्य प्रॉडक्ट बेचने पर ज्यादा रूबल मिलेंगे, जिसका इस्तेमाल सामाजिक कार्यक्रमों और सैन्य मकसदों के लिए किया जा सकता है।

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