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कमजोर देशों को धीरे-धीरे कर्ज के जाल में फंसाता है चीन, श्रीलंका ऐसे बना शिकार

चीन आर्थिक रूप से कमजोर, कम इनकम और राजनीतिक अस्थिरता का सामना करने वाले देशों को अपने जाल में फंसाता है। 2020 तक कम इनकम वाले देशों पर चीन का करीब 170 अरब डॉलर का कर्ज था

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 14, 2022 पर 6:55 PM
कमजोर देशों को धीरे-धीरे कर्ज के जाल में फंसाता है चीन, श्रीलंका ऐसे बना शिकार
चीन ने श्रीलंका के हैम्बनटोटा बंदरगाह के विस्तार के लिए पैसे देने का वादा किया। दक्षिण श्रीलंका में स्थित यह पोर्ट सिटी राजापक्षा का घर है। चीन ने बैंकों ने इस प्रोजेक्ट के लिए श्रीलंका को 1 अरब डॉलर का कर्ज दिया। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के काम में कई चीनी कंपनियां शामिल हुई

सोने की लंका का आज बुरा हाल है। लोगों को खाने-पीने की चीजें नहीं मिल रही हैं। फ्यूल के लिए पेट्रोल पंप और गैस स्टेशनों पर लंबी लाइन लग रही है। हॉस्पिटल में दवाइयां नहीं हैं। लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनों के उग्र होने की भी खबर है। सरकार को कुछ सूझ नहीं रहा। दरअसल, श्रीलंका आखिरकार चीन की डेट-ट्रैप डिप्लोमैसी का शिकार हो गया है।

चीन का शिकार बनने वाला पहला देश नहीं है श्रीलंका

चीन की डेट-ट्रैप डिप्लोमैसी का शिकार होने वाला श्रीलंका पहला देश नही है। इससे पहले लाओस इसका शिकार हो चुका है। क्या है चीन की डेट-ट्रैप डिप्लोमैसी, इसका क्या मकसद है, श्रीलंका इसका शिकार कैसे हो गया? इन सवालों के जवाब मुश्किल नहीं हैं। इसके लिए आपको सिर्फ थोड़ा पीछे जाना होगा। चीन के खतरनाक मंसूबों को समझना होगा। यह जानना होगा कि कैसे चीन कमजोर और आर्थिक रूप से गरीब देशों को अपने जाल में फंसाता है।

लाओस को भी अपने जाल में फंसा बर्बाद कर चुका है चीन

लाओस एक छोटा देश है। इसकी आबादी करीब 75 लाख है। इसकी सीमा म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम और चीन से लगती है। चीन ने लाओस में एक रेलवे लाइन बनाई है, जिसे चाइना-लाओस रेल नेटवर्क कहा जाता है। 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के तहत चीन ने लाओस के साथ इसे बनाने का समझौता किया। यह प्रोजेक्ट 6 अरब डॉलर का था। इसमें चीन की हिस्सेदारी 70 फीसदी थी।

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