जहां एक तरफ कई सारी बड़ी कंपनियां और स्टार्टअप्स अपने यहां छंटनी कर रहे हैं तो वहीं ऑनलाइन कैब या टैक्सी प्रोवाइडर कंपनी उबर (Uber) ने ऐलान किया है कि वह अपने यहां से कर्मचारियों को निकालने की कोई भी प्लानिंग नहीं कर रही है। दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उबर के सीईओ दारा खोसरोशाही ने बयान दिया कि उनकी कंपनी मौजूदा वक्त में किसी भी तरह की छंटनी किए जाने की कोई योजना नहीं बना रही है।
उबर के सीईओ ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एनुअल मीटिंग के दौरान के दौरान वाल स्ट्रीट जर्नल के एक इवेंट में कहा कि कंपनी ने महीनों तक लागत में कटौती करने का कीम किया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार उबर के सीईओ ने कहा कि उबर कार फ्लीट में शामिल 20 फीसदी हिस्सा 12 से 15 सालों के दौरान सेल्फ ड्राइविंग के लिए तैयार हो जाएगा। उबर कार निर्माताओं से राइट शेयरिंग के उद्देश्य से निर्माण को लेकर बात करने में इच्छुक है।
कई कंपनियों में चल रही हैं छंटनी
बता दें कि साल 2023 की शुरुआत कई सारे कर्मचारियों के लिए एक बुरे सपने की तरह से रही है। इस महीने के सुरुआती 15 दिनों में ही 91 से भी ज्यादा कंपनियों ने 24 हजार से भी ज्यादा टेक इंप्लॉइज को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। छंटनी को ट्रैक करने वाली वेबसाइट Layoff Tracker के मुताबिक इस साल 15 जनवरी तक, अमेजन, कॉइनबेस और सेल्सफोर्स समेत कई कंपनियों में 24151 कर्मचारियों की छंटनी की गई है। पिछले साल यानी 2022 में मेटा, ट्विटर, ओरैकल, स्नैप, उबर और इंटेल जैसी कंपनियों ने भी अपने यहा से करीब 1,53,110 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था।
अमेजन ने भी किया था छंटनी का ऐलान
बता दें कि ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन ने भी 5 जनवरी को दुनिया भर में अलग अलग डिपार्टमेंट्स से 18 हजार कर्मियों की छंटनी का ऐलान किया था। अमेजन इंडिया ने अपने 1 फीसदी कर्मचारियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। छंटनी का यह असर केवल टेक कर्मियों पर ही नहीं बल्कि अन्य सेक्टर्स के लोगों पर भी देखने को मिल रहा है। जैसे कि डायमंड सिटी के रूप में फेमस सूरत में करीब 20 हजार लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। वहीं वित्तीय सेक्टर की अहम कंपनी Goldman Sachs ने भी बड़ी संख्या में अपने यहां से कर्मचारियों को बाहर कर दिया है।