Vedanta के बॉस अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी सक्सेस स्टोरी शेयर करते रहते हैं। बुधवार को उन्होंने ट्विटर पर एक दिलचस्प स्टोरी शेयर की। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे लंदन स्टॉक एक्सचेंज में वेदांता की लिस्टिंग के लिए उन्हें करीब 100 किलोमीटर साइकिल चलानी पड़ी थी। वेदांता लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) पर लिस्ट होने वाली पहली कंपनी थी।
अग्रवाल ने ट्विट में कहा है, "लंदन स्टॉक एक्सचेंज में अपनी कंपनी लिस्ट कराने के लिए मैं कई कंपनियों, वकीलों और बैंकरों से मिलता था। मैं उन्हें यह बताना चाहता था कि मेरी कंपनी क्या दे सकती है और इससे भी अहम यह कि मेरा देश दुनिया को क्या दे सकता है।" लेकिन, 90 फीसदी बार नाकामी झेलनी पड़ी।
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अग्रवाल को यह बताया गया कि उनका विजन ठीक नहीं है। उनसे यह भी कहा गया कि उनकी कंपनी में पैसे लगाना इनवेस्टर्स के लिए काफी रिस्की है, क्योंकि वह पहली बार अपनी कंपनी लिस्ट करा रहे हैं। फिर, एक नेटवर्किंग कार्यक्रम में उनकी मुलाकात जेपी मॉर्गन, बीएचपी और लिंकलेटर्स के टॉप इनवेस्टर से हुई, जो एक साइक्लिंग ट्रिप पर जा रहे थे।
वेदांता के बॉस ने बताया, "इयान हैनम (इनवेस्टमेंट बैंकर जो बाद में जेपी मॉर्गन के वाइस-चेयरमैन बने) ने मुझे उनके साथ ऑक्सफोर्ड तक साइकिल चलाने का चैलेंज दिया, जो करीब 100 किमी दूर था। मैंने तुरंत हां कर दी। मैं खेलकूद में ज्यादा हिस्सा नहीं लेता था, जिससे कुछ घंटे बाद मेरे लिए साइकिल चलाना मुश्किल हो गया।"
उन्होंने बताया कि पहले कभी उन्हें इतने दर्द का अहसास नहीं हुआ था। लेकिन, इस सोच से मुझे ज्यादा दर्द का अहसास हुआ कि अगर मैं चूक गया तो मेरी कंपनी लिस्ट नहीं हो पाएगी। इसलिए मैंने जोर से पैडल मारना शुरू किया। आखिर में अग्रवाल ने ट्रिप पूरी की और साथ ही इनवेस्टर्स का भरोसा भी जीत लिया।
अग्रवाल ने यह भी बताया कि इंडियन फूड ने उन्हें दोस्त बनाने और संभावित इनवेस्टर्स की मदद हासलि करने में काफी मदद की है। उन्होंने कहा, "साइकिल ट्रिप से लेकर दोस्तों को इंडियन फूड खिलाने सहित मैंने अपने इनवेस्टर्स को मेरी कंपनी और मेरे देश की संभावनाओं के बारे में बताने के लिए सबकुछ किया।" 2003 में इसका नतीजा सामने आया। वेदांता लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने वाली पहली इंडियन कंपनी बन गई।
जिंदगी से जुड़े अपने अनुभव बताते हुए अग्रवाल कहते हैं, "सपना देखने वाले उन सभी लोगों को जो यह पढ़ रहे हैं, उन्हें सार्थक बिजनेस रिलेशंस बनाने के लिए कॉन्फ्रेंस रूम की चारदिवारी से बाहर निकलना चाहिए। अगर आप खेलकूद में हिस्सा नहीं लेते हैं तो भी साइकिल चलाएं। आप अपने सपने में भरोसा रखें, चाहे लोग कुछ भी कहें और उस सफर का आनंद ले जो आप कर रहे हैं। "