WHO के इस फैसले ने अमेरिका सहित पश्चिमी देशों पर डाला Chinese Vaccine को स्वीकार करने का दबाव

WHO के एक फैसले से अमेरिका सहित सभी पश्चिमी देशों पर चाइनीज कोविड वैक्सीन को मान्यता देने और इसे अपने देश में इस्तेमाल करने की मंजूरी देने का दबाव बढ़ गया है

अपडेटेड Jul 02, 2021 पर 9:30 AM
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक फैसले से अमेरिका सहित सभी पश्चिमी देशों पर चाइनीज कोविड वैक्सीन (Chinese COVID Vaccines) को मान्यता देने और इसे अपने देश में इस्तेमाल करने की मंजूरी देने का दबाव बढ़ गया है। दरअसल, गुरुवार को WHO ने कहा कि उसने जिन कोविड वैक्सीन्स को इमरजेंसी यूज की मंजूरी दी है, उस वैक्सीन को सभी देशों को मान्यता देनी चाहिए।

WHO के इस फैसले को अमेरिका, यारोप सहित पश्चिमी देशों को चुनौती के रूप में देखा जा रहै है, जिन्होंने कोरोना को कंट्रोल करने में कम प्राभावी चाइनीज वैक्सीन को अपने देशों में मंजूरी नहीं दी है।

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WHO ने कहा कि विश्व विदेशी नागरिकों के लिए अपने दरवाजे खोल रहा है, ऐसे में WHO से जिन वैक्सीन को इमरजेंसी यूज की मंजूरी मिली है, उन वैक्सीन्स को सभी देशों में आवाजाही के लिए मान्यता मिलनी चाहिए।

फाइजर और बायोएनटेक (Pfizer-BioNTech) की कोविड वैक्सीन के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मॉडर्ना, जॉनसन एंड जॉनसन और एस्ट्राजेनेका के कोविड वैक्सीन को इमरजेंसी यूज की मंजूरी दी है। इसके साथ ही 2 कम प्रभावी चाइनजी वैक्सीन सिनोफार्म (Sinopharm) और सिनोवैक (Sinovac) को भी WHO से मान्यता मिली हुई है।

लेकिन इन दोनों चाइनीज वैक्सीन को अमेरिका सहित यूरोपियन कंट्रीज ने मंजूरी नहीं दी है। मई में यूरोपियन यूनियन ने कहा था कि वह अपने देशों में केवल उन्हीं विदेशी नागरिकों को आने की मंजूरी देगा, जिन्होंने यूरोपियन मेडिकल एजेंसी के अप्रूव कोविड वैक्सीन लगवाया होगा। यूरोपियन मेडिकल एजेंसी ने रूकस वैक्सून स्पुतनिक-V को भी मंजूरी नहीं दी है, लेकिन कहा कि अगर देश चाहें तो इसे मंजूरी दे सकते हैं। 

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कोरोना की रोकथाम के लिए पश्चिमी देश अमेरिका में डेवलप वैक्सीन पर ही बहुत हद तक आश्रित हैं। कई यूरोपीय देशों ने भारत में बने एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन कोविशील्ड को भी मंजूरी नहीं दी है। जबकि कई विकासशील देश भारत और चीन मे वैक्सीन अपने यहां लगवा रहे हैं। लेकिन जिन देशों ने चीनी वैक्सीन लगवाया है, वहां दोबारा कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं।

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