विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और मोजाम्बिक ने जंगली पोलियोवायरस (Wild Poliovirus) टाइप 1 के प्रकोप की घोषणा की है। इससे पहले अफ्रीकी देश में एक बच्चा इस बीमारी की चपेट में आया था। इसकी पुष्टि अधिकारियों ने भी की थी। WHO ने कहा कि यह इस साल दक्षिणी अफ्रीका में जंगली पोलियोवायरस का दूसरा मामला है। ये बाहर से यहां आया है।
इससे पहले 1992 में देश का पहला ऐसा केस फरवरी के मध्य में मलावी में आया था। यह वायरस तब भी एक बच्चे में पाया गया था। मार्च में उस बच्चे के शरीर पर लकवा का असर दिखने लगा था।
WHO के अनुसार, जीनोमिक सीक्वेंसिंग विश्लेषण इस ओर इशारा करता है कि ये नया कंफर्म केस, उस स्ट्रेन से जुड़ा है, जिसका 2019 में पाकिस्तान में पता चला था।
इसने कहा, "अफ्रीका में जंगली पोलियोवायरस के एक और मामला मिलना बहुत ही चिंताजनक है। भले ही यह मलावी में हालिया प्रकोप को देखते हुए आश्चर्यजनक हो। हालांकि, यह दिखाता है कि यह वायरस कितना खतरनाक है और कितनी तेजी से फैल सकता है।"
एजेंसी ने कहा, "हम पोलियो से लड़ने के लिए दक्षिणी अफ्रीकी सरकारों का समर्थन कर रहे हैं। वायरस को रोकने और बच्चों को इसके हानिकारक प्रभाव से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर असरदार वैक्सीनेशन ड्राइव भी चलाया जा रहा है।"
The Guardian के मुताबिक, अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के डिप्टी डायरेक्टर अहमद ओगवेल ओउमा ने बताया, "जब सीक्वेंसिंग की गई, तो उस केस में उस मामले से मिलती-जुलती काफी समानताएं थीं, जो कुछ हफ्ते पहले मलावी में सामने आया था।"
फरवरी में, मलावी ने 30 सालों में जंगली पोलियोवायरस का पहला मामला सामने आने की घोषणा की थी। तब लिलोंग्वे जिले में एक तीन साल की लड़की को वायरस के कारण लकवा मार गया था।
WHO ने कहा, विश्व स्तर पर, जंगली पोलियोवायरस केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान में स्थानिक है। पोलियो बेहद संक्रामक है। ज्यादातर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। इसका कोई इलाज नहीं है और इसे केवल वैक्सीनेशन से ही रोका जा सकता है।