Asif Ali Zardari: पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अपने देश में रहने वाले हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने भारत-पाकिस्तान संबंधों और दोनों देशों की विचारधारा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में जरदारी ने दावा किया कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू कहीं और की तरह ही स्वतंत्र हैं। इसी दौरान उन्होंने भारत की 'अखंड भारत' की सोच का भी जिक्र किया।
जरदारी ने यह विवादित टिप्पणी 14 अगस्त को इस्लामाबाद में यदगार-ए-फतह (Victory Monument) समारोह को संबोधित करते हुए की। यह कार्यक्रम पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया था।
'हम ऐसे मुसलमान हैं जो सहन करते हैं'
पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने अपने देश की पहचान और वहां रहने वाले हिंदू समुदाय का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान में करीब 3 से 4 प्रतिशत हिंदू आबादी है। उन्होंने कहा, "हम ऐसे सोच वाले मुसलमान हैं जो सहन करते हैं।" इसके बाद उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू उतने ही स्वतंत्र और अच्छे हालात में हैं, जितने वे कहीं और होते।
जरदारी ने आगे हिंदू समुदाय को लेकर एक और बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू भारत की तुलना में पाकिस्तान के साथ रहना ज्यादा पसंद करेंगे। हालांकि, यह जरदारी का राजनीतिक दावा है। उन्होंने इसके समर्थन में कोई सर्वेक्षण या आंकड़ा पेश नहीं किया।
'भारत की सोच अलग है, उसका अपना एजेंडा है'
अपने भाषण में जरदारी ने भारत और पाकिस्तान की सोच के बीच अंतर बताने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भारत का नजरिया अलग है और उसका अपना एजेंडा है। इसी संदर्भ में उन्होंने 'अखंड भारत' का जिक्र किया।
जरदारी के मुताबिक, भारत 'अखंड भारत' की विचारधारा में विश्वास करता है। लेकिन उनके शब्दों में इस सोच के बीच बहुत कुछ ऐसा है जिसे भारत भूल चुका है। जरदारी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान की पहचान अलग-अलग है। उन्होंने पाकिस्तान को मुस्लिम देश बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विचारधारा का अंतर है।
हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर पाकिस्तान का दावा
पाकिस्तान में हिंदू देश के प्रमुख धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों में शामिल हैं। जरदारी ने अपने भाषण में पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी का अनुमान 3 से 4 प्रतिशत बताया। जरदारी ने दावा किया कि उन्हें वहां पूरी आजादी हासिल है। उन्होंने अपने भाषण में पाकिस्तान की मुस्लिम पहचान को 'सहनशीलता' के नजरिये से पेश किया। उन्होंने कहा कि वे ऐसे मुसलमान हैं जिनकी सोच सहन करने वाली है।
हालांकि, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर लंबे समय से अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में कई तरह की चिंताएं सामने आती रही हैं। इसलिए जरदारी के बयान को उनके राजनीतिक भाषण के संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है।
'अखंड भारत' का जिक्र क्यों अहम?
जरदारी का 'अखंड भारत' का उल्लेख राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत में 'अखंड भारत' की अवधारणा को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक व्याख्याएं रही हैं। पाकिस्तान अक्सर इस अवधारणा को अपनी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पहचान के संदर्भ में देखता है। जरदारी ने इसी मुद्दे को भारत और पाकिस्तान की अलग-अलग राष्ट्रीय पहचान से जोड़ते हुए कहा कि दोनों देशों की सोच में बड़ा अंतर है।
उनके भाषण का मुख्य संदेश पाकिस्तान को एक मुस्लिम राष्ट्र के रूप में पेश करना और भारत के साथ उसकी वैचारिक दूरी को रेखांकित करना था। इसके अलावा हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर उन्होंने पाकिस्तान की स्थिति को सहिष्णु और स्वतंत्र बताने की कोशिश की।