1kW, 2kW या 3kW? घर के लोड के हिसाब से चुनें सही सोलर सिस्टम, जानें खर्च, बचत, सब्सिडी और अप्लाई करने का पूरा प्रोसेस
PM Surya Ghar Yojana Rooftop Solar: मध्यमवर्गीय भारतीय परिवारों के लिए 2 किलोवाट का सोलर सिस्टम सबसे ज्यादा पॉपुलर और किफायती माना जाता है। जिसका मासिक बिजली बिल ₹1500 से ₹3000 के बीच आता है। उसके लिए ये बेस्ट सिस्टम है। यह रोजाना 8 से 10 यूनिट यानी महीने में करीब 240-300 यूनिट बिजली जेनरेट करता है
1 किलोवाट सोलर पैनल लगाने के लिए लगभग 100 वर्ग फुट छाया-मुक्त जगह की जरूरत होती है।
Rooftop Solar Panel: बढ़ती गर्मी और लगातार महंगे होते बिजली के बिलों से राहत पाने के लिए आजकल सोलर पैनल लगवाना सबसे बढ़िया ऑप्शन है। सरकार भी 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत सोलर लगवाने पर बंपर सब्सिडी दे रही है। लेकिन नया सोलर सिस्टम लगवाते समय लोगों के मन में सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यही होता है कि उनके घर के लिए 1 किलोवाट, 2 किलोवाट या फिर 3 किलोवाट, कौन सा सिस्टम सही रहेगा?
अगर आप भी इस बात को लेकर परेशान हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है। आज हम आपको बेहद आसान भाषा में समझाएंगे कि आपके घर के लोड, बिजली के बिल, सब्सिडी के गणित और इसे लगवाने के स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस की पूरी डिटेल क्या है।
सबसे पहले समझें सोलर सिस्टम के प्रकार
कोई भी किलोवाट चुनने से पहले आपको यह पता होना चाहिए कि आप किस तरह का सिस्टम लगवा रहे हैं:
ऑन-ग्रिड सोलर (On-Grid): यह सरकारी बिजली ग्रिड से जुड़ा होता है। इसमें बैटरी की जरूरत नहीं होती। दिन में बनने वाली एक्स्ट्रा बिजली ग्रिड में चली जाती है नेट मीटरिंग के जरिए और रात में आप ग्रिड से बिजली लेते हैं। सरकार की तरफ से सब्सिडी सिर्फ इसी सिस्टम पर मिलती है।
ऑफ-ग्रिड सोलर (Off-Grid): इसमें बैटरी बैकअप होता है। जिन इलाकों में बिजली बहुत ज्यादा कटती है, वहां यह बेस्ट है। हालांकि, यह ऑन-ग्रिड से थोड़ा महंगा होता है और इस पर सरकारी सब्सिडी नहीं मिलती।
किसके लिए सही है 1 किलोवाट का सोलर सिस्टम?
यह सबसे छोटा और बेसिक सोलर सिस्टम है। यह उन घरों के लिए बेस्ट है जिनका बिजली का बिल बहुत कम आता है और घर में भारी उपकरण नहीं चलते। अगर आपका मासिक बिजली बिल ₹1000 से ₹1500 के बीच आता है, तो यह सिस्टम आपके लिए बढ़िया होगा।
इस सिस्टम पर आप 3-4 LED बल्ब, 2-3 पंखे, 1 टीवी, 1 लैपटॉप/कंप्यूटर और एक छोटा फ्रिज आराम से चला सकते हैं। साथ ही इस पर AC, गीजर, वॉटर पंप (समरसेबल) या वाशिंग मशीन जैसे हैवी लोड नहीं चलेंगे। यह सिस्टम हर दिन लगभग 4 से 5 यूनिट यानी महीने में करीब 120-150 यूनिट बिजली बनाता है। 1 किलोवाट के ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम पर सरकार ₹30000 की सब्सिडी देती है।
किसके लिए सही है 2 किलोवाट का सोलर सिस्टम?
मध्यमवर्गीय भारतीय परिवारों के लिए 2 किलोवाट का सोलर सिस्टम सबसे ज्यादा पॉपुलर और किफायती माना जाता है। जिसका मासिक बिजली बिल ₹1500 से ₹3000 के बीच आता है। उसके लिए ये बेस्ट सिस्टम है।
इस पर 1kW का सारा लोड तो चलेगा ही, साथ ही आप 0.5 HP या 1 HP का वॉटर पंप, मिक्सर ग्राइंडर, वाशिंग मशीन और कूलर भी चला सकते हैं। इस पर आप दिन के समय 1 टन का इन्वर्टर एसी चला सकते हैं, बशर्ते उस वक्त फ्रिज और मोटर जैसे अन्य भारी उपकरण बंद हों।
यह रोजाना 8 से 10 यूनिट यानी महीने में करीब 240-300 यूनिट बिजली जेनरेट करता है। 2 किलोवाट के ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम पर सरकार ₹60000 की भारी सब्सिडी देती है।
3 किलोवाट का सोलर सिस्टम?
अगर आपके घर में आधुनिक सुख-सुविधाओं के सारे सामान हैं और आप बिजली के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर होना चाहते हैं, तो 3kW का सिस्टम आपके लिए है।
इस सिस्टम पर आप बिना किसी टेंशन के 1.5 टन का इन्वर्टर AC, बड़े साइज का फ्रिज, वाशिंग मशीन, वॉटर पंप, गीजर और घर की सभी लाइटें-पंखे एक साथ चला सकते हैं। यह हर दिन लगभग 12 से 15 यूनिट बिजली बनाता है।
3 किलोवाट या उससे अधिक (3kW to 10kW) की क्षमता पर सरकार अधिकतम ₹78000 की सब्सिडी देती है। 3 किलोवाट पर निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस पर मैक्सिमम सब्सिडी मिल जाती है।
रजिस्ट्रेशन: सबसे पहले सरकार के आधिकारिक पोर्टल pmsuryaghar.gov.in पर जाएं। वहां अपना राज्य, बिजली वितरण कंपनी का नाम, अपना बिजली कंज्यूमर नंबर, मोबाइल नंबर और ईमेल डालकर रजिस्टर करें।
आवेदन: लॉग इन करने के बाद 'रूफटॉप सोलर' के लिए अप्लाई करें। यहां आपको अपने घर की छत की डिटेल्स और आप कितने किलोवाट का सोलर लगवाना चाहते हैं, वह जानकारी भरनी होगी।
डिस्कॉम से मंजूरी: आपके आवेदन के बाद स्थानीय बिजली विभाग आपकी फिजिबिलिटी की जांच करेगा। मंजूरी मिलने के बाद आप अपने डिस्कॉम के पास रजिस्टर्ड किसी भी वेंडर से सोलर पैनल इंस्टॉल करवा सकते हैं।
इंस्टॉलेशन और नेट मीटरिंग: वेंडर द्वारा सोलर पैनल लगाने के बाद, आपको इसकी जानकारी पोर्टल पर सबमिट करनी होगी। इसके बाद बिजली विभाग के अधिकारी आपके घर आकर नेट मीटर लगाएंगे, जो यह हिसाब रखेगा कि आपने कितनी बिजली बनाई और कितनी इस्तेमाल की।
सब्सिडी का भुगतान: नेट मीटर लगने और डिस्कॉम द्वारा कमीशनिंग रिपोर्ट जारी होने के बाद, आपको पोर्टल पर अपने बैंक खाते की डिटेल और कैंसिल्ड चेक की कॉपी अपलोड करनी होगी। इसके 30 दिनों के भीतर सब्सिडी की राशि सीधे आपके बैंक खाते में आ जाएगी।
लगाने से पहले इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
छत पर जगह: 1 किलोवाट सोलर पैनल लगाने के लिए लगभग 100 वर्ग फुट छाया-मुक्त जगह की जरूरत होती है। 3kW के लिए छत पर करीब 300 वर्ग फुट साफ जगह होनी चाहिए जहां दिन भर अच्छी धूप आती हो।
वेंडर का चुनाव: सोलर हमेशा सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त वेंडर से ही लगवाएं, तभी आपको सब्सिडी का लाभ मिलेगा और 25 साल की पैनल वारंटी का फायदा भी होगा।