8th Pay Commission: इस तरह भी कर्मचारियों की लगेगी लॉटरी! यूनियनों की डिमांड पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय? जानिए
8th Pay Commission Fitment Factor: केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन हर 10 साल में रिवाइज होती है और यह फैसला अगले दशक यानी लगभग 2036 तक प्रभावी रहेगा, इसलिए कर्मचारी यूनियंस बहुत आक्रामक डिमांड कर रही हैं। ज्यादातर यूनियंस का मानना है कि 3.0 का फिटमेंट फैक्टर तो सिर्फ शुरुआती बेस होना चाहिए
7वें वेतन आयोग के तहत 2.57 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करते हुए न्यूनतम बेसिक पे ₹18000 तय की गई थी
8th Pay Commission Fitment Factor: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं। करीब एक दशक की महंगाई और बढ़ते लिविंग एक्सपेंस के बीच अब सबसे बड़ा सस्पेंस 'फिटमेंट फैक्टर' को लेकर बना हुआ है। सरकारी कर्मचारियों की यूनियंस, कर्मचारी और पेंशनर्स इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि महंगाई के असर को खत्म करने के लिए इस बार फिटमेंट फैक्टर में बड़ा इजाफा होना चाहिए।
आइए समझते हैं कि यह फिटमेंट फैक्टर क्या होता है, इसको लेकर एक्सपर्ट्स का क्या अनुमान है और कर्मचारी यूनियंस सरकार से क्या मांग कर रही हैं।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
आसान शब्दों में कहें तो फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीप्लायर है, जिसका इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक पे (Basic Pay) और पेंशन को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। इसका आपकी इन-हैंड सैलरी और नए सैलरी स्ट्रक्चर पर सीधा असर पड़ता है। इसका सीधा सा फार्मूला है:
रिवाइज्ड बेसिक पे=वर्तमान बेसिक पे×फिटमेंट फैक्टर
7वें वेतन आयोग के तहत 2.57 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करते हुए न्यूनतम बेसिक पे ₹18000 तय की गई थी। अब इस बार जो भी फिटमेंट फैक्टर तय होता है उससे इसमें जो भी बढ़ोतरी होगी, उससे कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बड़ा उछाल आएगा। वैसे इतिहास पर नजर डालें तो 2006 में आए छठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर का मैट्रिक्स 1.86 था, जिसे 2016 में 7वें वेतन आयोग के दौरान बढ़ाकर 2.57 कर दिया गया था।
एक्सपर्ट्स का क्या है अनुमान?
बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी के मुताबिक, '7वें वेतन आयोग ने 2016 में फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया था। तब से लेकर अब तक के दशक में भारत में संचयी सीपीआई (CPI) महंगाई लगभग 56% रही है, जिसने सरकारी सैलरी की क्रय शक्ति को काफी कम कर दिया है। ऐसे में 8वें वेतन आयोग के तहत कोई भी संशोधन करते समय 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स की वास्तविक जरूरतों और सरकारी खजाने की क्षमता के बीच संतुलन बनाना होगा'।
एनालिस्ट्स और एक्सपर्ट्स का मानना है कि, इस बार फिटमेंट फैक्टर 2.28 से 2.86 के बीच रह सकता है। अगर सरकार इसे 2.86 तय करती है, तो न्यूनतम बेसिक पे ₹18000 से बढ़कर ₹51480 हो जाएगा, जो 2016 से अब तक की महंगाई के अनुपात में होगा।
कर्मचारी यूनियंस की क्या है डिमांड
चूंकि केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन हर 10 साल में रिवाइज होती है और यह फैसला अगले दशक यानी लगभग 2036 तक प्रभावी रहेगा, इसलिए कर्मचारी यूनियंस बहुत आक्रामक मांग कर रही हैं। ज्यादातर यूनियंस का मानना है कि 3.0 का फिटमेंट फैक्टर तो सिर्फ शुरुआती बेस होना चाहिए।
विभिन्न संगठनों की मांगें इस प्रकार हैं:
अगर यूनियंस की 3.8 या 4.0 वाली मांगें मान ली जाती हैं, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी सीधे ₹69000 से ₹72000 के बीच पहुंच जाएगी, जिससे पूरा सैलरी स्ट्रक्चर बदल जाएगा।
यूनियंस क्यों अड़ी हैं हाई फिटमेंट फैक्टर पर?
यूनियंस का तर्क है कि पिछले कुछ सालों में रीटेल महंगाई, घर के किराए, हेल्थकेयर के खर्चों में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, एक वेतन आयोग से दूसरे वेतन आयोग के बीच 10 साल का एक लंबा गैप होता है। अब जो भी फैसला होगा वह 2036 तक चलेगा, इसलिए कर्मचारियों की परचेजिंग पावर और मोटिवेशन बनाए रखने के लिए बड़ा हाइक जरूरी है।
अभी बातचीत जारी, अंतिम फैसला बाकी
8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर को लेकर चल रही यह बहस असल में महंगाई के अनुसार सैलरी सुधार और राजकोषीय जिम्मेदारी के बीच का संतुलन है। जहां एक्सपर्ट्स 2.5 से 2.8 के बीच का एक मध्यम रास्ता सुझा रहे हैं, वहीं यूनियंस 3.0 से 4.0 के लिए अड़ी हैं। फिलहाल सरकार की ओर से इस पर कोई अंतिम फैसला या घोषणा नहीं हुई है और कंसल्टेशन का दौर जारी है।