8th Pay Commission: कर्मचारियों की लगेगी लॉटरी! सिर्फ DA नहीं, इस सीक्रेट फॉर्मूले से सीधे ₹69000 होगी न्यूनतम बेसिक सैलरी

8th Pay Commission Letest Update: 8वें वेतन आयोग की चल रही बैठकों में कर्मचारी यूनियनों ने इस फॉर्मूले में बड़े बदलाव की मांग की है। यूनियनों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई, बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल खर्च के इस दौर में पुराना फॉर्मूला अब बेअसर हो चुका है। समझिए क्या है नया फॉर्मूला और इससे आपकी सैलरी पर कितना बड़ा असर पड़ने वाला है

अपडेटेड May 29, 2026 पर 11:42 AM
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सैलरी कैलकुलेशन के पीछे एक ऐसा सीक्रेट फॉर्मूला है, जो आपकी बेसिक सैलरी में बंपर इजाफा कर सकता है

8th Pay Commission New Formula: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। अगर आप सोच रहे हैं कि नए वेतन आयोग में आपकी सैलरी सिर्फ महंगाई भत्ते (DA) या फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बढ़ेगी, तो आप गलत हैं। सैलरी कैलकुलेशन के पीछे एक ऐसा सीक्रेट फॉर्मूला काम कर रहा है, जो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी को सीधे ₹69000 तक पहुंचा सकता है।

इस फॉर्मूले का नाम है 'फैमिली यूनिट फॉर्मूला'। 8वें वेतन आयोग की चल रही बैठकों में कर्मचारी यूनियनों ने इस फॉर्मूले में बड़े बदलाव की मांग की है। यूनियनों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई, बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल खर्च के इस दौर में पुराना फॉर्मूला अब बेअसर हो चुका है। आइए जानते हैं क्या है यह फॉर्मूला और इससे आपकी सैलरी पर कितना बड़ा असर पड़ने वाला है।

क्या होता है 'फैमिली यूनिट फॉर्मूला' और 'एकरॉयड फॉर्मूला'?


वेतन आयोग जब भी किसी कर्मचारी की न्यूनतम सैलरी तय करता है, तो वह यह देखता है कि एक आम परिवार को सम्मानजनक जीवन जीने, खाने-कपड़े और मकान के लिए कम से कम कितने पैसों की जरूरत है।

एकरॉयड फॉर्मूला (Aykroyd Formula): भारत में न्यूनतम वेतन तय करने के लिए इसी फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है। यह फॉर्मूला भोजन, कपड़ा और मकान के बुनियादी खर्चों के आधार पर न्यूनतम वेतन की गणना करता है।

क्या है मौजूदा व्यवस्था: अभी तक के नियमों के मुताबिक, सरकार एक कर्मचारी के परिवार को '3 यूनिट' मानकर चलती है। इसमें कर्मचारी, उसकी पत्नी और बच्चों के खर्च को सीमित दायरे में आंका जाता है।

3 से बढ़ाकर 5 यूनिट करने की मांग, जानिए नया गणित

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आज के आधुनिक भारतीय परिवार की हकीकत बदल चुकी है। बूढ़े माता-पिता की देखभाल और सामाजिक सुरक्षा अब अनिवार्य है।

नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने वेतन आयोग के सामने प्रस्ताव रखा है कि अब परिवार को 3 यूनिट के बजाय '5 यूनिट' माना जाना चाहिए। इसका गणित कुछ इस तरह है:

कर्मचारी और उसकी पत्नी/पति = 1-1 यूनिट (कुल 2)

दो बच्चे = 0.8-0.8 यूनिट (कुल 1.6)

आश्रित माता-पिता = दोनों मिलाकर 0.8 यूनिट (महिला कर्मचारी अपने सास-ससुर को भी शामिल कर सकती हैं)

यह पूरा जोड़ 5.2 यूनिट बैठता है, जिसे राउंड ऑफ करके 5 यूनिट करने की सिफारिश की गई है। इसके लिए यूनियनों ने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण कानून' और 'सोशल सिक्योरिटी कोड 2020' का भी हवाला दिया है।

अगर मांग मानी गई, तो ₹69000 होगी न्यूनतम बेसिक सैलरी!

NC-JCM द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में साफ कहा गया है कि अगर 5 यूनिट के परिवार के हिसाब से खाने, रहने, इलाज, ट्रांसपोर्ट और बच्चों की पढ़ाई का खर्च जोड़ा जाए, तो न्यूनतम जरूरी खर्च बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

₹69000 की बेसिक पे: इस 5 यूनिट के फॉर्मूले के आधार पर स्टाफ साइड ने गणना की है कि कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69000 होनी चाहिए जो वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत ₹18000 है।

3.833 का फिटमेंट फैक्टर: अगर इस न्यूनतम वेतन को लागू करना है, तो मौजूदा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए फिटमेंट फॉर्मूला बढ़ाकर 3.833 करना होगा।

1.1 करोड़ से ज्यादा लोगों पर होगा सीधा असर

अगर 8वां वेतन आयोग इस फॉर्मूले और घरेलू खर्च के नए अनुमानों पर सहमत होता है, तो इसका असर सिर्फ बेसिक पे पर नहीं, बल्कि फिटमेंट फैक्टर, सभी तरह के भत्ते, ग्रेच्युटी, पेंशन और कुल सैलरी कैलकुलेशन पर पड़ेगा।

बता दें कि 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा पिछले साल 3 नवंबर 2025 को की गई थी। आमतौर पर भारत में हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग आता है। इस बार आयोग की सिफारिशें लागू होने से केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों सहित 1.1 करोड़ से अधिक लाभार्थियों और उनके परिवारों को सीधा बंपर फायदा मिलने वाला है।

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