8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर अब चर्चा सिर्फ सैलरी बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रह गई है। केंद्रीय कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ी चिंता अब रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन को लेकर बढ़ती जा रही है। इसी बीच एक बड़ा बदलाव चर्चा में है, जिसके तहत कर्मचारियों को अपनी जरूरत के हिसाब से पेंशन स्ट्रक्चर चुनने की ज्यादा आजादी मिल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक कर्मचारी संगठनों और आयोग के बीच इस मुद्दे पर लगातार बातचीत चल रही है। हालांकि सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कर्मचारी यूनियनों को उम्मीद है कि अगले 2 से 4 महीनों में इस दिशा में कुछ ठोस कदम देखने को मिल सकते हैं।
आखिर क्या बदलाव हो सकता है?
फिलहाल 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती हुए ज्यादातर केंद्रीय कर्मचारी National Pension System (NPS) के तहत आते हैं। इस व्यवस्था में कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन बाजार के प्रदर्शन और निवेश रिटर्न पर निर्भर करती है।
यही वजह है कि कई कर्मचारियों के मन में भविष्य को लेकर असुरक्षा बनी रहती है। उनका कहना है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली रकम तय नहीं होती और बाजार में उतार-चढ़ाव का असर सीधे पेंशन पर पड़ सकता है।
अब चर्चा इस बात पर हो रही है कि कर्मचारियों को अलग-अलग पेंशन विकल्पों में से चुनाव करने की ज्यादा सुविधा दी जाए, ताकि उन्हें भविष्य को लेकर भरोसा और स्थिरता मिल सके।
OPS और UPS की चर्चा क्यों बढ़ी?
पुरानी ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) में कर्मचारियों को आखिरी सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर तय पेंशन मिलती थी। इसमें बाजार जोखिम नहीं होता था, इसलिए कर्मचारी इसे ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। वहीं हाल ही में सरकार यून यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लेकर आई, जिसमें NPS जैसी योगदान आधारित व्यवस्था के साथ कुछ तय पेंशन सुरक्षा देने की कोशिश की गई है। अब कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि मौजूदा सिस्टम में OPS जैसी सुरक्षा और ज्यादा स्पष्टता मिले।
कर्मचारी क्यों कर रहे हैं बदलाव की मांग?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सिर्फ योगदान आधारित पेंशन मॉडल से कर्मचारियों की रिटायरमेंट सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं होती। All India NPS Employees Federation (AINPSEF) समेत कई संगठन आयोग के सामने यह मुद्दा उठा चुके हैं कि कर्मचारियों की पेंशन पूरी तरह बाजार के भरोसे नहीं छोड़ी जानी चाहिए। यूनियनों की मांग है कि कर्मचारियों को गारंटीड पेंशन सुरक्षा, महंगाई के हिसाब से बढ़ने वाली पेंशन और ज्यादा स्थिर रिटायरमेंट व्यवस्था दी जाए।
VRS लेने वालों के लिए भी हो सकती है राहत
चर्चा सिर्फ नियमित रिटायरमेंट तक सीमित नहीं है। कर्मचारी संगठन Voluntary Retirement Scheme (VRS) लेने वाले कर्मचारियों के लिए भी बदलाव की मांग कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावों में यह भी शामिल है कि जो कर्मचारी स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेते हैं, उन्हें अगले ही दिन से तय पेंशन लाभ मिलने शुरू हो जाएं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि दशकों तक सेवा देने के बाद VRS लेने वालों को पेंशन को लेकर अनिश्चितता का सामना नहीं करना चाहिए।