ITR Filing में बचें इन 10 गलतियों से, चूके तो जेब पर पड़ेगा भारी, आ सकता है नोटिस

10 ITR Filing Mistakes to avoid: यहां आईटीआर फाइलिंग में 10 ऐसी गलतियों के बारे में बताया जा रहा है जिनसे बचा जाना चाहिए, क्योंकि इन गलतियों से रिफंड मिलने में देरी हो सकती है, टैक्स देनदारी बढ़ सकती है, इनकम टैक्स से नोटिस आ सकता है तो पेनाल्टी तक लग सकती है

अपडेटेड May 28, 2026 पर 1:24 PM
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ITR Filing का पहला सबसे अहम काम सही आईटीआर फॉर्म चुनना है।

10 ITR Filing Mistakes to avoid: वित्त वर्ष 2026 (एसेसमेंट वर्ष 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग शुरू हो चुकी है। हालांकि इसे लेकर टैक्सपेयर्स को रिटर्न तैयार करने और इसे फाइल करने में सावधानी रखनी चाहिए। कुछ ऐसी गलतियां होती हैं, जिससे रिफंड मिलने में देरी हो सकती है, टैक्स देनदारी बढ़ सकती है, इनकम टैक्स से नोटिस आ सकता है तो पेनाल्टी तक लग सकती है। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक टैक्सपेयर्स को अपने इनकम डिस्क्लोजर्स और टैक्स क्रेडिट्स को फॉर्म 26एएस, AIS (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट) और इनकम टैक्स पोर्टल पर मौजूद प्री-फिल्ड डेटा से मिलान कर लेना चाहिए। सिंघानिया एंड कंपनी की पार्टनर रितिका नायर के मुताबिक ऐसा करने से गलतियों और नोटिस आने की आशंका को कम किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक रिटर्न फाइल करने के बाद निर्धारित समय के भीतर ई-वेरिफिकेशन भी कर लेना चाहिए, नहीं तो रिटर्न मान्य नहीं होगा।

ITR Filing में बचे इन 10 गलतियों से

गलत आईटीआर फॉर्म चुनना

टैक्सपेयर्स ने गलत आईटीआर फॉर्म के तहत रिटर्न फाइल किया तो इसे डिफेक्टिव माना जाएगा और प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है।


आय के सभी स्रोत की जानकारी नहीं देना

कई टैक्सपेयर्स ब्याज, डिविडेंड, किराये, फ्रीलांस या विदेशी इनकम की जानकारी नहीं देते, जिससे उनकी आय कम दिखती है।

फॉर्म 26एएस और एआईएस में मेल न खाना

अगर फॉर्म 16, एआईएस और फॉर्म 26एएस के फर्क है तो गलत रिपोर्टिंग हो सकती है और टैक्स विभाग से नोटिस आ सकता है।

गलत डिडक्शन क्लेम करना

अगर एनलिबिजल डिडक्शंस क्लेम करते हैं या एलिजिबल डिडक्शंस छोड़ देते हैं तो टैक्स देनदारी पर असर पड़ सकता है और जांच भी हो सकती है।

कैपिटल गेन की गलत जानकारी देना

शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन से हुए कैपिटल गेन की गलत जानकारी देने पर टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है।

विदेशी एसेट्स की गलत या अधूरी जानकारी देना

विदेशी संपत्तियों और विदेशी आय का सही खुलासा न करने पर इनकम टैक्स के तहत पेनल्टी लग सकती है।

गलत टैक्स रिजीम चुनना

पुरानी और नई टैक्स रिजीम की सही तुलना किए बिना रिटर्न फाइल करने से टैक्स बोझ बढ़ सकता है।

आईटीआर फाइलिंग की डेडलाइन से चूक जाना

देरी से रिटर्न फाइल करने पर ब्याज, लेट फीस, कुछ घाटे को फारवर्ड न कर पाने और पेनल्टी जैसी दिक्कतों से जूझना पड़ सकता है।

रिटर्न को ई-वेरिफाई करना भूल जाना

अगर निर्धारित समय के भीतर रिटर्न को वेरिफाई नहीं किया तो सफलतापूर्वक फाइल होने के बावजूद इसे अमान्य माना जाता है।

बैंक खाते की जानकारी गलत हो जाना

अगर बैंक खाते की डिटेल्स देने में गलती हो गई या इसे वैलिडेट नहीं किया तो रिफंड क्रेडिट फेल हो सकता है और देरी हो सकती है।

गलती हो जाने पर क्या करें?

बॉम्बे हाई कोर्ट के एडवोकेट (टैक्स एक्सपर्ट) गौतम ठक्कर का कहना कि अगर किसी टैक्सपेयर को ओरिजिनल रिटर्न फाइल करने के बाद इसमें कोई गलती मिलती है, तो उसे तुरंत यह पता करना चाहिए कि क्या वह रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकता है।

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