8th Pay Commission: देश में 8वें वेतन आयोग के लिए सुझाव देने की प्रक्रिया के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि तकनीकी गड़बड़ियों के कारण वह अपना मेमोरेंडम तक जमा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में अब डेडलाइन बढ़ाने और अन्य ऑप्शन के जरिये सुझाव लिये जाने की डिमांड एसोसिएशन कर रही है। पेंशनर्स एसोसिएशन सुझाव दिये जाने समयसीमा बढ़ाए जाने की मांग भी कर रहे हैं।
पोर्टल पर नहीं अपलोड हो रहा मेमोरेंडम
भारत पेंशनर्स समाज एसोसिएशन जो करीब 10 लाख पेंशनर्स का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रही है। उन्होंने कहा कि आयोग की वेबसाइट पर तकनीकी समस्याओं के कारण मेमोरेंडम अपलोड करना मुश्किल हो रहा है। एसोसिएशन के मुताबिक कई बार OTP वेरिफिकेशन के दौरान एरर आ जाता है और पेज खुलता ही नहीं। वहीं, सबमिशन के समय एसोसिएशन Invalid input detected एसोसिएशन जैसे मैसेज आ रहे हैं, जिससे प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही।
BPS का कहना है कि इन तकनीकी खामियों के कारण कई लोग समय रहते अपने सुझाव जमा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे पूरी कंसल्टेशन प्रोसेस पर असर पड़ रहा है। एसोसिएशन ने आयोग से मांग की है कि पोर्टल को तुरंत ठीक किया जाए और इसे आसान और यूजर-फ्रेंडली बनाया जाए।
BPS ने मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तारीख 30 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 31 मई 2026 करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि लोगों को ईमेल या हार्ड कॉपी के जरिए भी अपने सुझाव भेजने की सुविधा दी जाए, ताकि तकनीकी दिक्कतों के कारण कोई पीछे न रह जाए।
कई अहम मुद्दे छूटने का आरोप
पेंशनर्स एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा फॉर्मेट में कुछ अहम मुद्दों को शामिल करने की जगह नहीं है। इनमें NPS और UPS से जुड़े सवाल, महिलाओं के लिए सुविधाएं जैसे मैटरनिटी बेनिफिट, सुरक्षा, चाइल्ड केयर लीव और अलग-अलग विभागों से जुड़े खास मुद्दे शामिल हैं।
दूसरी ओर नेशनल को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ पेंशनर्स एसोसिएशन (NCCPA) ने भी आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि पोर्टल का मौजूदा स्ट्रक्चर काफी नहीं है। NCCPA ने सुझाव दिया है कि पोर्टल में ज्यादा सब-सेक्शन जोड़े जाएं और ऐसा सिस्टम बनाया जाए जिससे लोग अपने सुझाव विस्तार से दें सकें।
फिलहाल 8वां वेतन आयोग सुझाव लेने की प्रक्रिया में है और अलग-अलग जगहों पर बैठकें भी कर रहा है। लेकिन अगर पोर्टल से जुड़ी समस्याएं जल्द दूर नहीं होतीं, तो बड़ी संख्या में कर्मचारी और पेंशनर्स अपनी बात नहीं रख पाएंगे।