8th Pay Commission Salary Revision Factors: क्या 8वें वेतन आयोग में सिर्फ 'फिटमेंट फैक्टर' ही आपकी सैलरी और पेंशन बढ़ाएगा? जवाब है- नहीं! 3 नवंबर 2025 को बने इस आयोग का आधा समय यानी 9 महीने पूरा हो चुका है और अब फोकस केवल मांगों पर नहीं, बल्कि देश की आर्थिक हकीकत पर शिफ्ट हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कर्मचारियों का पे-स्केल तय करने के लिए 5 ऐसे बड़े आर्थिक कारण होंगे, जिन पर सरकार का सबसे ज्यादा जोर रहेगा।
आइए जानते हैं कि वे कौन-से 5 बड़े आर्थिक फैक्टर हैं, जो 1.1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन संशोधन को आकार देंगे।
फिटमेंट फैक्टर की मांग और इतिहास
फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला या मल्टीप्लायर है, जिसके जरिए कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।
पुराने वेतन आयोगों का ट्रेंड: 5वें वेतन आयोग में कोई एक समान ऑफिशियल मल्टीप्लायर नहीं था। वहीं 6वें वेतन आयोग में 1.86 और 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया गया था।
यूनियनों की मांग: 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठन 3.0 से 4.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, 'वेतन आयोग हमेशा एक समग्र दृष्टिकोण अपनाते हैं। फिटमेंट फैक्टर भले ही सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरता है, लेकिन यह व्यापक मूल्यांकन का केवल एक हिस्सा है।'
सैलरी और पेंशन तय करने वाले 5 मुख्य आर्थिक कारण
सिर्फ फिटमेंट फैक्टर से फैसला क्यों नहीं हो सकता?
फिटमेंट फैक्टर सीधे तौर पर मूल वेतन में वृद्धि तय करता है, इसलिए यह सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। हालांकि, कोई भी वेतन आयोग देश की आर्थिक वास्तविकताओं की अनदेखी करके सिर्फ एक आंकड़े पर फैसला नहीं ले सकता।
आयोग को कर्मचारियों की आकांक्षाओं और देश के राजकोषीय संतुलन के बीच तालमेल बिठाना होता है। हाल ही में भुवनेश्वर (6-7 जुलाई) और कोलकाता (9-10 जुलाई) में आयोजित क्षेत्रीय बैठकों में मिले सुझावों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट?
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट मई या जून 2027 के आसपास केंद्र सरकार को सौंपेगा। जब तक आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंप देता और सरकार उसे मंजूरी नहीं दे देती, तब तक वेतन वृद्धि या पेंशन सुधार को लेकर किए जाने वाले सभी अनुमान केवल संभावित हैं।