8th Pay Commission: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के गठन की तैयारी को लेकर चर्चाएं तेज हो चुकी हैं। हाल के हफ्तों में आधिकारिक स्तर पर कोई बड़ा अपडेट नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही आयोग की घोषणा कर सकती है। इस बीच, यह जरूरी है कि हम समझें कि पिछले यानी 7वें वेतन आयोग (7th CPC) ने कौन-कौन-सी कर्मचारी सुविधाओं को खत्म किया था। खासतौर पर, वे ब्याज-मुक्त कर्ज, जो एक समय पर लाखों सरकारी कर्मचारियों को राहत देते थे।
क्या होते थे Interest-Free Advances?
Interest-Free Advance यानी वो रकम जो केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को कुछ खास जरूरतों- जैसे साइकिल खरीदना, इलाज, त्योहार, ट्रांसफर आदि के लिए देती थी, वो भी बिना किसी ब्याज के। 6वें वेतन आयोग तक ये व्यवस्था जारी थी। लेकिन 7वें वेतन आयोग ने कुल 12 ऐसी एडवांस स्कीम्स को पूरी तरह बंद कर दिया।
7वें वेतन आयोग का तर्क क्या था?
कर्मचारी संगठनों ने मांग की थी कि इन ब्याज-मुक्त कर्ज की रकम को तीन गुना बढ़ाया जाए, लेकिन आयोग ने इसे अप्रासंगिक करार देते हुए खत्म करने की सिफारिश की। रिपोर्ट में कहा गया, “लगातार बढ़ते वेतन पैकेज के चलते अब इन कर्ज का अब कोई मतलब नहीं रह गया है। इन्हें जारी रखना प्रशासनिक रूप से भी खर्चीला है, इसलिए इन्हें समाप्त किया जाए।”
कौन-से एडवांस अब भी जारी है?
7वें वेतन आयोग ने सिर्फ दो एडवांस को जारी रखने की सिफारिश की थी। लेकिन ये ब्याज के साथ दिए जाते हैं, House Building Advance (HBA) और Advance for Purchase of Personal Computer। जैसे कि नाम से ही जाहिर है हाउस बिल्डिंग एडवांस (HBA) घर बनवाने या खरीदने के लिए मिलता है। वहीं, पर्सनल कंप्यूटर खरीदने के लिए एडवांस सिर्फ एक बार लिया जा सकता है।