महंगाई और बढ़ते आवास खर्चों के बीच अबू धाबी सरकार ने किरायेदारों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों के किराए में बढ़ोतरी पर अस्थायी रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद मकान मालिक फिलहाल किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। इसका फायदा अबू धाबी में रहने वाले हजारों भारतीय परिवारों और प्रोफेशनल को भी मिलेगा, जिनके मासिक खर्च का बड़ा हिस्सा घर के किराए पर जाता है। सरकार का मानना है कि इससे लोगों और कारोबारियों पर बढ़ते खर्च का बोझ कम होगा और उन्हें अपने बजट को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलेगी।
अबू धाबी रियल एस्टेट सेंटर (ADREC) ने 2 जून को यह आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, सभी किरायेदारी अनुबंधों (Tenancy Contracts) के नवीनीकरण पर किराया बढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। यानी किराए में 0% बढ़ोतरी लागू रहेगी। यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और अगली सूचना तक जारी रहेगा।
नए किरायेदारों को भी मिलेगा फायदा
ADREC ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई मकान या यूनिट पहले से किराए पर दी जा चुकी थी, तो उसके लिए नया कॉन्ट्रेक्ट भी उसी किराए पर किया जाएगा जिस पर पिछला कॉन्ट्रेक्ट था। इसका मतलब है कि मकान मालिक किरायेदार बदलने के बाद भी मनमाने तरीके से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे।
पिछले कुछ समय से अबू धाबी में रियल एस्टेट की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही रहने और कारोबार की लागत भी बढ़ी है। पहले के नियमों के तहत मकान मालिक कुछ शर्तों के साथ सालाना 5% तक किराया बढ़ा सकते थे। सरकार का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किराया बढ़ोतरी पर रोक लगाने से लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी और किराए के बाजार में स्थिरता आएगी।
किरायेदारों और कारोबारियों को क्या फायदा होगा?
इस फैसले से किरायेदारों को हर साल बढ़ने वाले किराए की चिंता से राहत मिलेगी। परिवार अपने मासिक बजट की बेहतर योजना बना सकेंगे। वहीं, दुकानों, दफ्तरों और अन्य कमर्शियल प्रतिष्ठानों को भी किराए के खर्च में स्थिरता मिलेगी, जिससे वे अपने कारोबार की बेहतर योजना बना सकेंगे।
रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कदम किरायेदारों को लंबे समय तक बनाए रखने और बाजार में संतुलन कायम रखने में मदद कर सकता है। हालांकि इस नीति का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह रोक कितने समय तक लागू रहती है और इसे सभी एरिया में किस तरह लागू किया जाता है।