ITR Filing 2026: फ्रीलांसर, डॉक्टर और IT प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी राहत! बिना ऑडिट आसान होगा ITR फाइल करना
Income Tax: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, आईटी प्रोफेशनल्स और सेल्फ इम्पलॉयड प्रोफेशनल के लिए एक खास टैक्स सुविधा काफी फायदेमंद साबित हो सकती है
इनकम टैक्स अधिनियम की धारा 44ADA के तहत पात्र प्रोफेशनल्स बिना डिटेल हिसाब-किताब रखे अपनी इनकम घोषित कर सकते हैं।
Income Tax: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, आईटी प्रोफेशनल्स और सेल्फ इम्पलॉयड प्रोफेशनल के लिए एक खास टैक्स सुविधा काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इनकम टैक्स अधिनियम की धारा 44ADA के तहत पात्र प्रोफेशनल्स बिना डिटेल हिसाब-किताब रखे अपनी इनकम घोषित कर सकते हैं। इससे न सिर्फ टैक्स फाइलिंग आसान हो जाती है, बल्कि ऑडिट और रिकॉर्ड रखने की परेशानी से भी राहत मिलती है।
क्या है Section 44ADA?
Section 44ADA को छोटे और मध्यम स्तर के प्रोफेशनल्स के लिए लाया गया था ताकि उन्हें टैक्स नियमों का पालन करने में आसानी हो। इस योजना के तहत पात्र प्रोफेशनल अपनी कुल प्राप्तियों (Gross Receipts) का 50% हिस्सा आय मानकर टैक्स चुका सकते हैं।
इसका मतलब है कि अगर किसी प्रोफेशनल की सालाना आय 40 लाख रुपये है, तो वह 20 लाख रुपये को अपनी टैक्सेबल इनकम मानकर टैक्स भर सकता है। इसके लिए अलग-अलग खर्चों का डिटेल रिकॉर्ड दिखाने की जरूरत नहीं होती।
कौन उठा सकता है इसका फायदा?
इस योजना का लाभ केवल भारत में रहने वाले व्यक्ति (Resident Individual), हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और पार्टनरशीप फर्म (Partnership Firm) उठा सकते हैं। हालांकि LLP यानी लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप इसके दायरे में नहीं आती।
यह सुविधा वकील, डॉक्टर, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट, तकनीकी सलाहकार, इंटीरियर डेकोरेटर, फिल्म कलाकार, अधिकृत प्रतिनिधि और आईटी प्रोफेशनल्स जैसे पेशेवरों के लिए उपलब्ध है।
वहीं, कमीशन एजेंट, ब्रोकर, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर या ऐसे कारोबार जो अधिसूचित पेशों की सूची में शामिल नहीं हैं, वह आमतौर पर इस योजना का लाभ नहीं ले सकते।
टर्नओवर की क्या है लिमिट?
Section 44ADA का लाभ तब लिया जा सकता है जब किसी प्रोफेशनल की सालाना कुल प्राप्तियां 50 लाख रुपये तक हों। हालांकि यदि कुल प्राप्तियों और पेमेंट में कैश ट्रांजेक्शन 5% से कम है, तो यह लिमिट बढ़कर 75 लाख रुपये तक हो सकती है। यानी डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने यह एक्स्ट्रा सुविधा दी है।
यदि प्राप्तियां 75 लाख रुपये से अधिक हो जाती हैं, तो प्रोफेशनल इस योजना के लिए पात्र नहीं रहेगा और उसे टैक्स ऑडिट की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
क्या टैक्स ऑडिट से मिलती है छूट?
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यही है कि पात्र प्रोफेशनल्स को आमतौर पर डिटेल अकाउंट बुक्स रखने और टैक्स ऑडिट कराने की जरूरत नहीं होती। हालांकि यदि कोई प्रोफेशनल अपनी आय को कुल प्राप्तियों के 50% से कम दिखाना चाहता है, तो उसे टैक्स ऑडिट कराना पड़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बैंक स्टेटमेंट, बिल, GST रिटर्न, AIS और अन्य जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं।
ITR-4 या ITR-3, कौन सा फॉर्म भरना होगा?
Section 44ADA का लाभ लेने वाले अधिकांश प्रोफेशनल्स ITR-4 फॉर्म भर सकते हैं।
हालांकि कुछ मामलों में ITR-4 का उपयोग नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति के पास अनलिस्टेड शेयर हैं, वह किसी कंपनी का डायरेक्टर है, उसे बड़ा कैपिटल गेन हुआ है, F&O या क्रिप्टो से आय हुई है या उसके पास विदेशी संपत्ति है, तो उसे ITR-3 भरना होगा।
असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए Section 44ADA चुनने वाले प्रोफेशनल्स के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 है।
क्या 80C जैसी टैक्स छूट भी मिलेगी?
हां, Section 44ADA चुनने के बावजूद करदाता धारा 80C, 80D और अध्याय VI-A के तहत मिलने वाली अन्य टैक्स छूटों का लाभ उठा सकते हैं, बशर्ते वह संबंधित शर्तों को पूरा करते हों।
रिटर्न भरने से पहले क्या जांचें?
ITR दाखिल करने से पहले GST टर्नओवर और वास्तविक प्राप्तियों का मिलान जरूर कर लें। साथ ही डिजिटल ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड भी संभालकर रखें, खासकर यदि आप 75 लाख रुपये वाली बढ़ी हुई लिमिट का लाभ लेना चाहते हैं।