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इंटरेस्ट रेट बढ़ने के बाद होम लोन की EMI और Tenure में से क्या बढ़ाना फायदेमंद होगा?

RBI के एक बार फिर इंटरेस्ट बढ़ाने से होम लोन लेने वाले लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। इससे उनकी EMI एक बार फिर बढ़ने जा रही है। अगर वे EMI नहीं बढ़ाना चाहते हैं तो लोन की अवधि बढ़ानी होगी। कई लोग पहले ही लोन की अवधि बढ़ाने के विकल्प का इस्तेमाल कर चुके हैं

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Feb 08, 2023 पर 7:00 PM
इंटरेस्ट रेट बढ़ने के बाद होम लोन की EMI और Tenure में से क्या बढ़ाना फायदेमंद होगा?
फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन जो 1 अक्टूबर, 2019 के बाद सैंक्शन हुए हैं, वे एक एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक्ड हैं। ज्यादातर मामलों में यह बेंचमार्क रेपो रेट है।

RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने 8 फरवरी को रेपो रेट (Repo Rate) 0.25 फीसदी बढ़ाने का ऐलान किया। इससे यह बढ़कर 6.50 फीसदी हो गया है। पिछले साल मई में रेपो रेट बढ़ने का सिलसिला शुरू हुआ था। तब से यह कुल 2.5 फीसदी बढ़ चुका है। इसका सीधा असर होम लोन लेने वाले लोगों पर पड़ा है। उनकी EMI लगातार बढ़ रही है। आइए जानते हैं रेट बढ़ने का असर अलग-अलग तरह के होम लोन के ग्राहकों पर किस तरह पड़ रहा है।

रेपो रेट बढ़ने का ज्यादातर बोझ बैंक ग्राहकों पर डाल चुके हैं

फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन जो 1 अक्टूबर, 2019 के बाद सैंक्शन हुए हैं, वे एक एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक्ड हैं। ज्यादातर मामलों में यह बेंचमार्क रेपो रेट है। इसलिए ऐसा लोन लोन लेने वाले ग्राहकों का इंटरेस्ट रेट रेपो रेट बढ़ने के तुरंत बाद बढ़ जाता है। पिछले साल मई के बाद से अब तक रेपो रेट जितना बढ़ा है, उसका ज्यादातर बोझ बैंकों ने ग्राहकों पर डाल दिया है।

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