फ्रंट-रनिंग (Front-Running) के मामले सामने आने के बाद म्यूचुअल फंड्स के काम करने के तरीकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इससे म्यूचुअल फंड्स के करोड़ों ग्राहकों के भरोसे को ठेस लगने का डर है। ग्राहक इस उम्मीद में म्यूचुअल फंड्स की स्कीमों में इनवेस्ट करते हैं कि उनके पैसे का निवेश पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। पिछले हफ्ते सेबी ने IIFL और Fidelity से जुड़े फ्रंट-रनिंग के मामलों में अपना अंतिम आदेश दिया था।
