बच्चों में प्रॉपर्टी बांटने के तरीके को लेकर फिक्रमंद हैं? जानिए इसका आसान समाधान

बच्चों के बीच विवाद की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए जरूरी है कि आपको अपनी जिंदगी में ऐसे एसेट्स का बंटवारा कर देना चाहिए। समस्या तब शुरू होती है, जब नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स बांटने की बात आती है। प्रॉपर्टी यानी जमीन और मकान इसके उदाहरण हैं। इसी तरह ज्वैलरी, पेंटिंग्स और पुरानी कलाकृतियों को बांटना भी एक चैलेंज है

अपडेटेड Sep 08, 2023 पर 7:06 PM
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम तौर पर विदेश में रहने वाले व्यक्ति की दिलचस्पी इंडिया में प्रॉपर्टी में नहीं होती है। इसकी वजह है कि प्रॉपर्टी की मेंटेनेंस उनके लिए सिरदर्द बना जता है। इस पर टैक्स का मसला अलग है।

क्या आपने अपनी मौत के बाद फाइनेंशियल एसेट्स बच्चों के बीच बांटने के बारे में सोचा है? यह काम मुश्किल नहीं है। फाइनेंशियल एसेट्स की वैल्यू बदलती रहती है। इसलिए आप बच्चों की संख्या के हिसाब से उन्हें बराबर हिस्सों में बांट सकते हैं। समस्या तब शुरू होती है, जब नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स बांटने की बात आती है। प्रॉपर्टी यानी जमीन और मकान इसके उदाहरण हैं। इसी तरह ज्वैलरी, पेंटिंग्स और पुरानी कलाकृतियों को बांटना भी एक चैलेंज है। इसकी वजह यह है कि आपको उनकी सही वैल्यू पता नहीं होती। बाद में बच्चों के बीच विवाद की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए जरूरी है कि आपको अपनी जिंदगी में ऐसे एसेट्स का बंटवारा कर देना चाहिए।

विदेश में रहने वाली बच्चे की दिलचस्पी प्रॉपर्टी में कम होती है

मान लीजिए आपके पास दो घर हैं। पहले घर में आप रहते हैं, जबकि दूसरा हॉलीडे होम है जो पहाड पर है। अगर आपके दो बच्चों में से एक इंडिया में रहता है और दूसरा विदेश में तो उनके बीच घरों का बंटवारा करना आसान है। आप उन्हें एक-एक घर दे सकते हैं। समस्या तब होती है जब आपके पास एक ही घर है और उसे दो हिस्सों में बांटना है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम तौर पर विदेश में रहने वाले व्यक्ति की दिलचस्पी इंडिया में प्रॉपर्टी में नहीं होती है। इसकी वजह है कि प्रॉपर्टी की मेंटेनेंस उनके लिए सिरदर्द बना जता है। इस पर टैक्स का मसला अलग है। सैंक्टम वैल्थ में वेल्थ प्लानिंग की हेड स्नेहा मखीजा ने कहा कि विदेश में रहने वाले बच्चे को फाइनेंशियल एसेट दिया जा सकता है।


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को-ओनरशिप मॉडल है समस्या का समाधान

लेकिन, अगर आपके पास सिर्फ प्रॉपर्टी है तो आपको उन्हें दो हिस्सों में बांटना जरूरी है। इसके लिए आप को-ओनरशिप मॉडल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस व्यवस्था में प्रॉपर्टी के एक से ज्यादा मालिक हो सकते हैं। मनसुख लाल हीरालाल एंड कंपनी की पार्टनर पूर्वी अशेर ने कहा कि कई पेरेंट्स इस तरीके को व्यावहारिक समाधान के रूप में देखते हैं। उन्हें लगता है कि यह ऐसा तरीका है, जो बच्चों में आगे लड़ाई की आशंका को खत्म कर देता है। लेकिन, उनकी सलाह है कि जब तक एसेट को दो अलग भागों में बांटा नहीं जा सकता, आपको प्रॉपर्टी को ज्वाइंट नाम में नहीं करना चाहिए।

देखभाल करने वाले बच्चे की चिंता जरूरी

कुछ पेरेंट्स के साथ अलग तरह की स्थिति होती है। एक बच्चा माता-पिता के साथ रहता है। उनकी देखभाल करता है, जबकि दूसरा बच्चा अलग रहता है। ऐसे में अगर आपका एक ही मकान है और आप इसे बच्चों में बांटना चाहते हैं तो क्या रास्ता होगा? इसका समाधान यह है कि आप अपनी वसीयत में एक फॉर्मूला शामिल कर सकते हैं। इसमें यह लिखा होगा कि आपके निधन के बाद मकान बेच दिया जाएगा और उससे मिलने वाले पैसे को दो अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया जाएगा। लेकिन, जो बच्चा आपकी देखभाल करता है, उसे जब तक रहने के लिए दूसरी सुविधा नहीं मिल जाती, उसे इस घर में रहने का अधिकार होगा।

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