मिडिल क्लास परिवारों के अपने घर के सपने को पूरा करने में होम लोन (Home Loan) बहुत मदद करता है। लेकिन, पिछले एक साल में जिस तरह से होम लोन के इंटरेस्ट रेट्स बढ़े हैं, उससे होम लोन लेने वाले दिक्कतों का बहुत दिक्कत हो रही है। पिछले साल मई से RBI ने छह बार रेपो रेट बढ़ाया है। इससे यह 6.5 फीसदी हो गया है। इससे होम, ऑटो और पर्सनल लोन सस्ते हो गए हैं। लोगों की EMI बहुत बढ़ गई है। जिन लोग ज्यादा ईएमआई नहीं चाहते, बैंकों ने उनके लोन का पीरियड बढ़ा दिया है।
होम लोने का बोझ घटाने वाले उपायों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। लोग उन तरीकों के बारे में जानना चाहते हैं जो ईएमआई के उनके बोझ को कम कर सकते हैं। इस बारे में लोग एक्सपर्ट्स की सलाह ले रहे हैं। इनमें फ्लोटिंग रेट का सेलेक्शन, होम लोन का प्रीपेमेंट और ऐसे बैंक की तलाश शामिल है, जो कम रेट पर लोन दे सकता है। आइए इन उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
डाउनपेमेंट का अमाउंट बढ़ाएं
होम लोन का प्रीपेमेंट करें
प्रीपेमेंट करने से आपके कुल लोन का अमाउंट घट जाएगा। इससे आपकी EMI भी कम हो जाएगी। आप चाहें तो बैंक को एकमुश्त रकम चुकाकर अपने लोन का कुछ हिस्सा पहले ही चुका सकते हैं या समय-समय पर कुछ-कुछ हिस्सा चुका सकते हैं। प्रीपेमेंट भी इंटरेस्ट पर होने वाले आपके खर्च को बचाने में मदद करता है। लंबी अवधि में यह बहुत बड़ा फर्क पैदा करता है। कुछ बैंक प्रीपेमेंट पर पेनाल्टी लगाते हैं। इसलिए आपको इसके बारे में पहले से चेक कर लेना ठीक होगा। अगर प्रीपेमेंट से आपको ज्यादा फायदा हो रहा है तो फिर पेनाल्टी चुकाने में कोई हर्ज नहीं है।
फ्लोटिंग रेट इंटरेस्ट का चुनाव करें
अगर आप फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट की जगह फ्लोटिंग रेट का चुनाव करते हैं तो इससे आपको अपनी EMI घटाने में मदद मिलेगी। जब आप फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट पर होम लोन लेते हैं तो उसका इंटरेस्ट रेट फिक्स्ड नहीं होता है। वह मार्केट की स्थितियों के हिसाब से बढ़ या घट सकता है। जब मार्केट में रेट्स कम होते हैं तो आपके लोन का इंटरेस्ट रेट भी घट जाता है। इससे आपकी EMI भी कम हो जाती है। लेकिन, आपको यह ध्यान रखना होगा कि जब मार्केट में रेट्स ज्यादा होते हैं तो आपका इंटरेस्ट रेट्स भी बढ़ जाता है। इसलिए इसमें थोड़ा रिस्क है। इसलिए इस बारे में फैसला लेने से पहले आपको ठीक से सोच लेना अच्छा रहेगा।
कम इंटरेस्ट रेट वाले बैंक में लोन का ट्रांसफर
कई बार होम लोन लेने वाले ग्राहक को पता चलता है कि वह जितना इंटरेस्ट चुका रहा है, उससे कम इंटरेस्ट रेट पर दूसरा बैंक लोन ऑफर कर रहा है। ऐसी स्थिति में आप अपना लोन उस बैंक में ट्रांसफर कर सकते हैं, जिसका इंटरेस्ट रेट अपेक्षाकृत कम है। इससे आपकी EMI घट जाएगी। लंबी अवधि में इससे आपको काफी फायदा होगा। इंटरेस्ट पर खर्च होने वाला आपका काफी पैसा बच जाएगा। लेकिन, इसके लिए पहले आपको उस बैंक के नियम और शर्तों को ठीक से समझ लेना होगा, जो कम इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।