सिक्योरिटीज (securities) में निवेश आपको सिर्फ अच्छा रिटर्न ही नहीं देती, बल्कि जरूरत के समय आप इसे तुरंत बेचकर अपनी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। लेकिन यदि आप अपने इंवेस्टमेंट को लिक्विड नहीं करना चाहते हैं तो सिक्योरिटीज के अगेंस्ट लोन भी ले सकते हैं। इससे अपना इंवेस्टमेंट बना रहेगा और उस पर ब्याज और डिविडेंड आदि मिलता रहेगा। 

अगर आपने शेयर मार्केट में अच्छी कंपनियों के स्टॉक्स (Stocks) में इंवेस्ट किया है या फिर म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में निवेश किया है या फिर बॉन्ड (Bond) जैसे किसी अन्य प्रतिभूतियों (securities) में निवेश किया है तो इसे गिरवरी रखकर यानी इन सिक्योरिटीज के प्लेज (Pledge) करके आप लोन ले सकते हैं, वो भी काफी कम इंटरेस्ट रेट पर।

लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज (Loan against securities- LAS) भले ही लोन लेने का सबसे तेज तरीका नहीं हो, लेकिन इन्हें गिरवी रखकर यानी प्लेज करके आप सस्ती ब्याज दरों पर लोन ले सकते हैं। बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थान होम लोन से 2 या 3% अधिक इंटरेस्ट LAS पर चार्ज करते हैं, लेकिन यह इंटरेस्ट रेट पर्सनल लोन के इंटरेस्ट रेट से काफी कम होता है। 

LAS का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे आपके फंड्स की जरूरतें तो पूरी हो ही जाती हैं, आपके इंवेस्टमेंट पर लोन अवधि के दौरान भी इंटरेस्ट, बोनस और डिविडेंड आदि मिलता रहता है। लोन के लिए आप कंपनियों के शेयर, इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड्स, इंश्योरेंस पॉलिसी और बॉन्ड आदि प्लेज कर सकते हैं।

किन सिक्योरिटी को प्लेज करके आपको लोन मिल सकता है, इसकी लिस्ट आमतौर पर लेंडर्स अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध होती है। उदाहरण के तैर पर मान लीजिए कोई बैंक टॉप 50 कंपनियों के शेयर ही LAS के लिए एक्सेप्ट कर सकता है। वहीं, इंश्योरेंस पॉलिसी और म्यूचुअल फंड के अगेंस्ट लोन के लिए उनके पास कंपनियों की स्पेशिफाइड लिस्ट हो सकती है।

इक्विटीज के मामले में लेंडर इंवेस्टमेंट का 50% से 60% अमाउंट आपको लोन के तैर पर दे सकते हैं। वहीं, डेट इंस्ट्रूमेंट और बॉन्ड के मानले में यह राशि अधिक हो सकती है। वहीं, अगर लोन अवधि के दौरान Securities की कीमत में भारी गिरावट आती है तो लेंडर एडिशनल सिक्योरिटीज भी प्लेज करने की डिमांड कर सकते हैं।

सिक्योरिटीज के अगेंस्ट लोन लेने पर बैंक आपके प्रोसेसिंग फीस के अलावा लोन एग्रीमेंट पर लगने वाला स्टांप ड्यूटी चार्ज और प्लेज क्रिएशन फीस आदि चार्ज कर सकता है। HDFC और Yes Bank जैसे कुछ लेंडर ऑनलाइन LAS की सुविधा देते हैं और यर प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस होती है। लेकिन ये लोन शॉर्ट टर्म लोन होते हैं।

बैंक और NBFCs आमतौर पर लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज मैक्सिमम 36 महीने यानी 3 साल की अवदि के लिए देते हैं। कुछ लेंडर लोन चुकाने के लिए फ्लेक्सिबल रीपेमेंट ऑप्शन उपलब्ध कराते हैं, जिसमें लोन लेने वाला व्यक्ति हर महीने इंटरेस्ट चुकाता है और लोन का टेन्योर समाप्त होने पर प्रिंसिपल अमाउंट चुकाना होता है।

सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।