क्या आप अपने बटुए में कई सारे कार्ड होने के कारण परेशान रहते हैं, जो उसे काफी भारी बना देता है? आपके बटुए में अमूमन कम से कम एक डेबिट कार्ड होता है, एक क्रेडिट कार्ड और शायद दो आइडेंटिटी कार्ड्स भी होते हैं। इसके अलावा, जाहिर तौर पर सिक्के और नोट तो रहते ही हैं। हालांकि, आपके बटुए का बोझ कम करने का एक तरीका है।

इंडसइंड बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे बैंकों ने अब ऐसा प्लास्टिक कार्ड पेश किया है, जिसमें डेबिट और क्रेडिट, दोनों की सुविधा एक ही कार्ड में मौजूद है। इंडसइंड बैंक ने अक्टूबर 2018 में अपना कार्ड डुओ लॉन्च किया और नवंबर 2018 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने कॉम्बो नाम से ऐसा ही कार्ड पेश किया।

इंडसइंड बैंक ने वीजा के साथ मिलकर यह कार्ड पेश किया है, जबकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने कॉम्बो कार्ड लॉन्च करने में रूपे की मदद ली है। रूपे और वीजा के मुताबिक, अन्य बैंकों के इस तरह के कार्ड लॉन्च करने फिलहाल योजना नहीं है।

इसमें क्या खास है?

ये डुअल कार्ड आम डेबिट या क्रेडिट कार्ड की तरह ही दिखते हैं, लेकिन इसकी टेक्नोलॉजी अलग है।

कार्ड में दो चिप हैं; एक चिप डेबिट कार्ड के तौर पर काम करती है, यह आपके बचत खाते से जुड़ी होती है और दूसरी क्रेडिट कार्ड के लिए काम करती है। ये दोनों चिप कार्ड की दो विपरीत दिशाओं पर मौजूद रहती हैं।

कार्ड के अगले हिस्से में दो चिप होने के अलावा इसके पीछे वाले हिस्से में दो मैग्नेटिक स्ट्रिप्स भी हैं। ग्राहकों को लेनदेन चाहे डेबिट हो या क्रेडिट के हिसाब से कार्ड को सिर्फ प्वाइंट ऑफ सेल सिस्टम में स्वाइप या डिप करने के लिए निर्धारित साइड का इस्तेमाल करना होगा। यह टाटा स्काई का विज्ञापन देखने जैसा है, जहां बॉलीवुड एक्टर आमिर खान डबल रोल में हैं और उनके आधे हिस्से की ड्रेस पति के जैसी है और आधी पत्नी की तरह। विज्ञापन में दिखाया गया है कि पति-पत्नी को इसलिए अलग होने होने की नौबत आ गई है, क्योंकि पत्नी लोकप्रिय यूके केबल सर्विस-स्काई चाहती है, जबकि पति का जोर टाटा ब्रांड पर है। आखिर में पति हंसते हुए बताता है कि वह सिर्फ मजाक कर रहा था और अपनी-अपनी अच्छी सेवाएं देने के लिए टाटा व स्काई दोनों मिलकर काम कर रहे हैं।

यहां सवाल है कि इस तरह के कार्ड्स का इस्तेमाल करना कितना अच्छा विकल्प है?

इंडसइंड बैंक में ईवीपी और मार्केटिंग ऐंड रिटेल अनसिक्योर्ड एसेट्स के हेड अनिल रामचंद्रन ने बताया कि ये डुओ कार्ड ग्राहकों को सुविधा और लचीलापन मुहैया कराते हैं। उन्हें अपनी तमाम वित्तीय जरूरतों के लिए दो अलग-अलग कार्ड्स के बजाय एक कार्ड रखने की जरूरत है और वे अपने बटुए में सिर्फ एक प्लास्टिक कार्ड के साथ यात्रा कर सकते हैं। ये डुअल कार्ड महीने के आखिर में सिंगल अकाउंट स्टेटमेंट भी तैयार करते हैं। लिहाजा, इससे ग्राहकों को एक ही स्टेटमेंट के जरिये अपने क्रेडिट और डेबिट खातों के खर्चों का हिसाब-किताब रखने में मदद मिलती है।

कार्ड की डेबिट और क्रेडिट साइड के इस्तेमाल पर मिलने वाले रिवॉर्ड प्वाइंट्स को बैंक हर महीने जोड़कर इकट्ठा करता है। ऐसे में ग्राहक प्वाइंट रिडीम करते वक्त इकट्ठा रिवॉर्ड प्वाइंट्स का फायदा उठा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर इंडसइंड बैंक के डूओ कार्ड का इस्तेमाल शॉपिंग में करने पर हर 150 रुपये के खर्च पर 1 रिवॉर्ड प्वाइंट मिलता है। रिवॉर्ड प्वाइंट्स कार्ड की डेबिट या क्रेडिट साइड इस्तेमाल करने पर मिलते हैं। नई पीढ़ी के ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए इन कार्ड्स में एंटरटेनमेंट, ट्रैवल और लाइफस्टाइल से जुड़े ऑफरों को भी शामिल किया गया है।

इस कार्ड के साथ ग्राहकों को दुर्घटना बीमा का कवर भी मिलता है। यूनियन बैंक का कॉम्बो कार्ड 4 लाख का कवर देता है, जबकि इंडसइंड बैंक का डुओ कार्ड 2 लाख का कवर देता है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया कॉम्बो कार्ड जारी करने के लिए 200 रुपये की फीस लेता है। हालांकि, इस कार्ड के लिए ग्राहकों को सालाना फीस नहीं देनी होगी। इंडसइंड बैंक के डूओ कार्ड दो तरह के हैं- प्लस और प्रीमियर। प्लस डूओ कार्ड जारी करने की फीस 1,500 रुपये है, जबकि प्रीमियम कार्ड के लिए यह फीस 3,000 रुपये है। इस वन टाइम चार्ज के अलावा कार्ड के लिए 799 रुपये की सालाना फीस भी देनी होगी।

इंडसइंड बैंक डूओ कार्ड के गुम होने की स्थिति में ग्राहकों को 3 लाख रुपये का बीमा कवर भी देता है आमतौर पर कुछ बैंकों द्वारा अपने चुनिंदा क्रेडिट और डेबिट कार्ड्स पर लाइबिलिटी बीमा कवर दिया जाता है। बीमा के क्लेम के लिए प्रक्रिया यह है कि अगर आपका कार्ड चोरी हो जाता है तो कार्ड को डीएक्टिवेट कराने और किसी भी तरह के फ्रॉड से बचने के लिए आपको तुरंत इस घटना की सूचना बैंक को देनी चाहिए। साथ ही, पुलिस स्टेशन में एफआईआर भी दर्ज करानी होगी। कार्ड के गुम होने और आपकी तरफ से इसकी सूचना बैंक को दिए जाने की अवधि के बीच चोरी हुए कार्ड पर किए गए ट्रांजैक्शन का भुगतान बैंक की ओर से किया जाता है।

सुविधा या सिरदर्द?

दो कार्ड्स को एक में मिला दिया जाना आपको कई सारे कार्ड रखने के झंझट से मुक्त करता है, लेकिन आपको इसके इस्तेमाल में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

पुणे की मंजू आप्टे का एक ऐसे बैंक में बचत खाता है, जो इसी तरह के डुअल कार्ड की सुविधा देता है। वह अप्रैल 2018 से इसी बैंक का डेबिट और क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर रही थीं। आप्टे चूंकि डेबिट और क्रेडिट कार्ड अलग-अलग इस्तेमाल कर रही थीं, लिहाजा नवंबर 2018 में उन्होंने डुअल कार्ड के लिए अप्लाई किया था। डुअल कार्ड इस्तेमाल करते हुए उन्होंने महसूस किया कि कई सारे कार्ड रखने के बजाय एक कार्ड लेकर चलना काफी सुविधाजनक है। उन्होंने इस कार्ड पर डेबिट और क्रेडिट दोनों साइड में एक ही पिन रख लिया। आप्टे ने जनवरी 2009 में गलती से डेबिट के बजाय क्रेडिट साइड से 15,000 रुपये निकाल लिए और जब उन्हें मंथली कार्ड स्टेटमेंट मिला तो वह इस बात को लेकर हैरत में थीं कि बैंक ने पैसे की निकासी पर 375 रुपये का चार्ज लगा दिया है।

आप्टे ने बताया कि मंथली स्टेटमेंट को देखते हुए वो परेशान थीं कि डेबिट साइड का इस्तेमाल करने पर बैंक ने नकद निकासी के लिए 375 रुपये का चार्ज क्यों लगाया है। बाद में बैंक के कर्मचारियों से पूछताछ करने पर मुझे पता चला कि उन्होंने गलती से क्रेडिट साइड की तरफ से पैसे निकाल लिए थे। लिहाजा, बैंक ने अतिरिक्त चार्ज लगा दिए। बैंक क्रेडिट कार्ड के जरिए कैश निकालने पर 2.5 फीसदी ब्याज दर यानी कम से कम 300 रुपए लेता है।

इस बात की प्रबल आशंका है कि ग्राहक ट्रांजैक्शन के दौरान एटीएम या पीओएस सिस्टम में कार्ड डालते या स्वाइप करते वक्त गलती कर सकते हैं। यहां तक मर्चेंट/कैशियर भी कार्ड स्वाइप करते वक्त गलती कर सकते हैं और डेबिट के बजाय क्रेडिट साइड स्वाइप हो सकती है। दरअसल, कार्ड के दोनों किनारों पर मैग्निक स्ट्रिप्स होती हैं, इसलिए यह गलती होने की आशंका ज्यादा रहती है। वित्तीय उत्पाद और सेवाओं से जुड़ी ऑनलाइन एग्रीगेटर MyLoanCare.in के को-फाउंडर और सीईओ गौरव गुप्ता कहते हैं कि ग्राहक कार्ड की डेबिट और क्रेडिट साइड के लिए अलग-अलग पिन रखकर इस समस्या को दूर कर सकते हैं।

मिसाल के तौर पर ऐसे डुअल कार्ड का इस्तेमाल करते वक्त आपको डेबिट साइड के लिए पिन, मान लें कि 1357 और क्रेडिट साइड के लिए मान लें कि पिन 2469 रखना चाहिए। साथ ही, अगर यह कार्ड चोरी हो जाता है या हैक कर लिया जाता है, तो आप क्रेडिट लिमिट गंवा देते हैं और आपको बचत खाते के विकल्प के नुकसान का भी सामना करना पड़ता है, क्योंकि डेबिट और क्रेडिट दोनों मामला एक ही कार्ड में होता है। यह एक ही बार में दोनों कार्ड गंवाने जैसा है; आपकी क्रेडिट लिमिट और आपका बचत खाता, दोनों खतरे में होता है।

मनीकंट्रोल की राय

इस तरह के कॉम्बो कार्ड का फायदा यह होता है कि आपको ज्यादा कार्ड नहीं रखने पड़ते। हालांकि, यहां यह याद रखने की जरूरत है कि अगर आप डुअल कार्ड का विकल्प चुनते हैं तो आपका डेबिट और क्रेडिट दोनों कार्ड एक ही बैंक से होना चाहिए। आमतौर पर हम उस बैंक के डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, जहां हमारा बचत खाता होता है। हालांकि, हम क्रेडिट कार्ड उस बैंक का लेते हैं जो हमें अपनी लाइफस्टाइल के अनुकूल कई तरह के फायदे देता है-मसलन एयरलाइंस माइल्स जीरो कार्ड, जीरो सरचार्ज पेट्रोल कार्ड, कैशबैक क्रेडिट कार्ड आदि। डुअल कार्ड की स्थिति में आपका विकल्प सिर्फ उस तरह के क्रेडिट कार्ड तक सीमित हो जाता है, जो आपके बैंक की तरफ से उपलब्ध है।

हालांकि, सबसे अहम बात यह है कि डुअल कार्ड रखने में जोखिम है। पैसे निकालते या खर्च करते वक्त आपको हमेशा याद रखना पड़ता है कि एटीएम में किस साइड से कार्ड डालना है। अगर आप गलती से गलत साइड का इस्तेमाल करते हैं तो आपको कुछ वैसी ही समस्या का सामना करना पड़ सकता है, जैसा कुछ महीने पहले पुणे की आप्टे को करना पड़ा।

गुप्ता के मुताबिक, ये कॉम्बो कार्ड आपके बटुए के लिए सही कार्ड नहीं हैं, क्योंकि लापरवाही के कारण ग्राहक के रूप में शायद आप इस बात को लेकर हमेशा सचेत नहीं रहे कि आप डेबिट कार्ड की तरफ से पैसे खर्च कर रहे हैं या क्रेडिट लिमिट की तरफ से पैसे निकाल कर रहे हैं। इस कार्ड का जितना फायदा है, जोखिम उससे कहीं ज्यादा है। हम आपको डुअल कार्ड से बचने का सुझाव देते हैं; डेबिट और क्रेडिट कार्ड को अलग-अलग ही रखें।