बैंकों ने फ्यूचर रिटेल को NPA खाते में डालना शुरु किया, अदालत से की Amazon और Reliance की बिडिंग को मंजूरी को देने की अपील

सुप्रीम कोर्ट एनपीए क्लासिफिकेशन लेटर के मुद्दे पर इस महीने के अंत सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह की टौगिंग पर फ्यूचर रिटेल को किसी तरह का अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है.

अपडेटेड Feb 03, 2022 पर 5:20 PM
फ्यूचर रिटेल पर बैंकों का लगभग 17000 करोड़ रुपये का कर्ज है और पूरे फ्यूचर ग्रुप का कर्ज इससे भी कही ज्यादा है।

फ्यूचर रिटेल को कर्ज देने वाले 27 लेंडरों (कर्ज देनें वालों) ने अदालत से मांग की है कि अमेजॉन और रिलायंस को फ्यूचर रिटेल के लिए बिडिंग (बोली लगाने) करने की अनुमति दी जाए। जिससे की उनके पैसे की तेजी से रिकवरी हो सके। गौरतलब है कि फ्यूचर रिटेल मामले में अमेजॉन और रिलायंस एक दूसरे के आमने सामने हैं।

लेंडरों का कहना है कि अगर कोर्ट में चल रही कानूनी कार्रवाई से इस मामले का समाधान खोजा जाता है तो उसमें काफी लंबा समय लगेगा और उनके पैसे की रिकवरी में बहुत देरी होगी। बैंकों ने इस बात को ध्यान में रखते हुए फ्यूचर रिटेल को दिए गए कर्जें को एनपीए की कैटेगरी में डालना शुरु किया है।

बैंकों की तरफ से अपनी दलील रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने तर्क रखा की फ्यूचर रिटेल के लिए 2 पिटीशनर है और हम (बैंक भी) इसमें एक पक्ष हैं और हमको अपनी रिकवरी के लिए एसेट बेचने का हक है। जिसको ध्यान में रखते हुए इन दोनों वादियों और प्रतिवादियों को (अमेजॉन और रिलायंस को ) फ्यूचर रिटेल के बिडिंग के अनुमति दे देनी चाहिए।


हम एक अनिश्चित फैसले के लिए एक साल की कानूनी लड़ाई का इंतजार क्यों करें। बीडिंग इस समस्या के समाधान के लिए एक अच्छा विकल्प है। इस पर अपनी बात रखते हुए राकेश द्विवेदी ने कहा कि बिडिंग ही बैंकों के पैसे की रिकवरी के लिए सबसे बेहतर तरीका है।

बता दें कि फ्यूचर रिटेल पर बैंकों का लगभग 17000 करोड़ रुपये का कर्ज है और पूरे फ्यूचर ग्रुप का कर्ज इससे भी कही ज्यादा है। सुप्रीम कोर्ट को आज यह जानकारी भी दे दी गई है कि फ्यूचर रिटेल को कर्ज देने वाले बैंकों ने फ्यूचर रिटेल के खाते को एनपीए के तौर पर क्लासीफाइ करना शुरु कर दिया है।

राकेश द्विवेदी ने इस मामले में आगे यह भी कहा कि अगर इस मामले में अमेजॉन की जीत होती है तो फ्यूचर रिटेल को बचाने के लिए एक प्राइवेट फंड के जरिए सिर्फ 7000 करोड़ रुपये मिलेंगे। वहीं अगर फ्यूचर रिटेल और रिलायंस के डील को मंजूरी मिल जाती है तो फ्यूचर ग्रुप को 25000 करोड़ रुपये मिलेंगे लेकिन इस चीज को लेकर बड़ी अनिश्चितता है कि इस कानूनी लड़ाई में जीतेगा कौन। ऐसे में ये दोनों कैश रिच पिटीशनर फ्यूचर रिटेल के एसेट के लिए अपनी बोली लगा सकते हैं। यही एक अकेला तरीका है जिससे बैंकों को फ्यूचर रिटेल में फंसे अपने पूरे पैसे वापस मिल सकते हैं। इसके साथ ही फ्यूचर रिटेल किसके पास जाएगा यह भी साफ हो जाएगा।

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट एनपीए क्लासिफिकेशन लेटर के मुद्दे पर इस महीने के अंत सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह की टौगिंग पर फ्यूचर रिटेल को किसी तरह का अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है।

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