बिहार के इस आदमी ने किया कमाल, 5 लाख रुपये से बनाई देश की बड़ी फार्मा कंपनी

बिहार के इस आदमी बड़ा कमाल करके दिखाया है। सिर्फ 5 लाख रुपये से देश की बड़ी फार्मा डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी खड़ी कर दी। दुनिया के कुछ सबसे सफल लोगों ने अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों में बड़े, जोखिम भरे कदम उठाए हैं। आज हम बिहार के एक ऐसे शख्स के बारे में बात कर जिसने 5 लाख रुपये से शुरुआत की और आज अरबों की कंपनी के मालिक है..

अपडेटेड Dec 08, 2023 पर 5:11 PM
बासुदेव सिंह ने सिर्फ 5 लाख रुपये से देश की बड़ी फार्मा डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी खड़ी कर दी।

Success Story: बिहार के इस आदमी बड़ा कमाल करके दिखाया है। सिर्फ 5 लाख रुपये से देश की बड़ी फार्मा डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी खड़ी कर दी। दुनिया के कुछ सबसे सफल लोगों ने अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों में बड़े, जोखिम भरे कदम उठाए हैं। यह सच है कि किसी भी कारोबारी को उनका धैर्य और कड़ी मेहनत उन्हें वह बनाती है जो वे आज हैं। आज हम बिहार के एक ऐसे शख्स के बारे में बात कर जिसने 5 लाख रुपये से शुरुआत की और आज अरबों की कंपनी के मालिक है।

फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में बासुदेव सिंह बड़ा नाम

फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में बासुदेव सिंह एक बडा नाम है। वह अल्केम लेबोरेटरीज (Alkem Laboratories) के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन हैं। बासुदेव बिहार के रहने वाले हैं और एक समय प्रोफेसर थे। उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। वह एक कारोबारी बनना चाहते थे। अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए वह फार्मा डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार शुरू करना चाहते थे। इसके लिए वह अपने चचेरे भाई संपेंद्र सिंह के पास गए और उनसे मदद मांगी।


साल 1962 में शुरू किया कारोबार

उन्होंने 1962 में अपने होमटाउन में फार्मा डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार शुरू किया और आज एक सफल कारोबार बन गए हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी खुद की फार्मास्युटिकल कंपनी लॉन्च करने का फैसला लिया। बासुदेव सिंह ने एक बार फोर्ब्स को एक इंटरव्यू में बताया था कि वह अपनी खुद की कंपनी शुरू करने के लिए वे केवल 5 लाख रुपये लेकर मुंबई चले गए। फिर उन्होंने कुछ जरूरी लाइसेंस लिए और साल 1973 में अल्केम लेबोरेटरीज नामक अपनी कंपनी लॉन्च की।

एक खास दवाई ने चमकाया बिजनेस

अपनी खुद की फार्मास्युटिकल कंपनी होने के बावजूद वह अपने फार्मा डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार को नहीं छोड़ पाए। अपनी स्वयं की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की बदौलत वह साल 1984 में 10 करोड़ रुपये का रेवेन्यू बनाने में सफल रहे। कुछ दशकों में कंपनी ने टैक्सीम नामक दवा जारी की। इसका इस्तेमाल बैक्टीरियल इंफेक्शन में किया जाता है। यह कदम अल्केम लेबोरेटरीज के लिए गेम चेंजर बन गया, क्योंकि यह पहली एंटी इफेक्टिव दवा बन गई जो देश में 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने में सक्षम थी। 2008 तक कंपनी ने 1000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का आंकड़ा पार कर लिया। फिर 2019 में कंपनी 1 बिलियन डॉलर के रेवेन्यू के मील के पत्थर तक पहुंच गई। फोर्ब्स के अनुसार बासुदेव सिंह की कुल संपत्ति 2.2 बिलियन डॉलर है।

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