Budget 2022: बजट में सरकार रिटेल सेक्टर और स्टार्टअप्स को राहत दे सकती है। भारत कंपनियों को एकीकरण (Amalgamation) के दौरान घाटे और डेप्रिसिएशन को कैरी फॉरवर्ड करने की इजाजत देने पर विचार कर रहा है। ताकि, सर्विस और रिटेल सेक्टर में काम कर रहे स्टार्टअप्स को कन्सॉलिडेट करने में मदद मिल सके। मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक सरकार इस पर विचार कर रही है।
वित्त मंत्रालय द्वारा नए प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है और इसे केंद्रीय बजट 2022-23 के प्रस्तावों के हिस्से के रूप में पेश किया जा सकता है।
अभी इडंस्ट्रियल यूनिट और बैंकिंग को Amalgamation में इस तरह की सुविधा दी जा रही है। हालांकि, वित्त मंत्रालय की तरफ से इस पर कुछ नहीं कहा गया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर अहम योगदानकर्ता के तौर पर उभर रहा है। एक्सोर्ट से आय का अहम जरिया बना है। कन्सॉलिडेशन से भारतीय कंपनियों को अपने वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों के साथ प्रतियोगी बनने में मदद मिलेगी।
अभी मैन्युफैक्चरिंग और शिपिंग जैसे सेक्टर्स की कंपनियों को 7-8 वर्षों तक के लिए संस्थाओं के Amalgamation के बाद व्यावसायिक नुकसान और डेप्रिसिएशन को आगे बढ़ाने के लिए मिलता है। यह इस तरह के लेन-देन में लचीलेपन की इजाजत देता है। दो कंपनियों के एक होने के बाद होने वाली इनकम के नुकासान को सेट करने का समय देता है।
हालांकि, यह प्रावधान सेवाओं और रिटेल सेक्टर में स्टार्टअप्स के लिए नहीं है, जिससे इन क्षेत्रों में Amalgamation की प्रक्रिया भारी हो जाती है, विशेष रूप से लाभ कमाने वाली इकाई के साथ घाटे में चल रही इकाई के विलय की स्थिति में काफी मुश्किलें पेश आती हैं।