बजट 2026 के जरिए नए इनकम टैक्स सिस्टम में और सुधार किए जाने की उम्मीदें बढ़ रही हैं। ClearTax के फाउंडर और CEO, अर्चित गुप्ता का कहना है कि नया सिस्टम अब ज्यादा टैक्सपेयर्स के लिए पसंदीदा विकल्प बनकर उभरा है। लेकिन कुछ मुख्य स्ट्रक्चरल कमियों के कारण टैक्सपेयर्स का एक बड़ा हिस्सा अभी भी इससे दूर है। ClearTax के डेटा के अनुसार, नया टैक्स सिस्टम अब 25 लाख रुपये से कम कमाने वाले व्यक्तियों के लिए बिना किसी शक के एक अच्छा विकल्प है। इसका कारण कम स्लैब्स और कम कंप्लायंस हैं।
लेकिन लगभग 26% टैक्सपेयर्स अभी भी पुराने टैक्स सिस्टम के साथ बने हुए हैं। अर्चित गुप्ता का कहना है कि यह बदलाव का विरोध नहीं है। कई सारे टैक्सपेयर्स का पूरा फाइनेंशियल लाइफसाइकिल HRA और होम लोन जैसे पुराने फायदों के इर्द-गिर्द बना हुआ है। पुराने से नए टैक्स सिस्टम में स्विच करने से उनके द्वारा क्रिएट किए गए लॉन्ग-टर्म वेल्थ स्ट्रक्चर में दिक्कत आती है।
नए टैक्स सिस्टम में भी जुड़े होम लोन के फायदे
बजट 2026 को लेकर एक मुख्य मांग यह भी है कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 24(b) का फायदा नए टैक्स सिस्टम में भी दिया जाए। होम लोन लेने वाले करदाता सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पेमेंट पर हर वित्त वर्ष 2 लाख रुपये तक का डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। लेकिन अभी यह फायदा पुराने टैक्स सिस्टम में ही मिलता है। होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट पर एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का डिडक्शन, सेक्शन 80C के तहत क्लेम किया जा सकता है।
रिटायरमेंट के लिए टैक्स डिडक्शन NPS तक न रहें सीमित
नए टैक्स सिस्टम में NPS में एंप्लॉयर की ओर से कॉन्ट्रीब्यूशन पर डिडक्शन का फायदा है। लेकिन ज्यादा इनकम वाले लोग आमतौर पर एक स्थिर रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए EPF, PPF और ELSS के मिक्स पर निर्भर रहते हैं। गुप्ता के मुताबिक, रिटायरमेंट प्लानिंग सिर्फ एक प्रोडक्ट तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसलिए सरकार को लंबी अवधि के ऐसे बचत विकल्पों की जरूरत पर गौर करना चाहिए, जो डायवर्सिफाइड हों। बता दें कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCD (2) के जरिए वेतनभोगी कर्मचारी अपने NPS खाते में एंप्लॉयर की ओर से योगदान पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकता है। वेतनभोगी कर्मचारी का एंप्लॉयर की ओर से खोला गया NPS अकाउंट, Tier-I कैटेगरी के तहत आता है।
NPS से पूरा 80% विदड्रॉल बने टैक्स-फ्री
इसके साथ ही NPS से पूरी 80% निकासी को टैक्स-फ्री किया जाना चाहिए। सरकार ने हाल ही में NPS से एकमुश्त निकासी की सीमा बढ़ाकर 80% कर दी है। लेकिन टैक्स-फ्री हिस्सा अभी भी 60% पर सीमित है। बाकी 20% पर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता है। पूरे 80% विदड्रॉल को टैक्स-फ्री करने से NPS में निवेश के असली फायदे मिलेंगे।