Healthcare Budget 2026: हेल्थकेयर के लिए बढ़ाया जाए खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वालिटी मेडिकल एजुकेशन पर भी हो फोकस

Healthcare Budget 2026: एक विकसित भारत, 2047 तक लगभग एक अरब मजबूत स्वस्थ युवाओं और वर्कफोर्स पर बनेगा। भविष्य के लिए तैयार हेल्थकेयर सिस्टम इस बात पर निर्भर करता है कि हम आज की मेडिकल वर्कफोर्स को कितनी अच्छी तरह तैयार करते हैं

अपडेटेड Jan 30, 2026 पर 1:21 PM
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टियर 3 और टियर 4 शहरों में अस्पताल शुरू करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार से 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट में हेल्थकेयर के लिए खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की अपील की है। ANI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पॉली मेडिक्योर लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हिमांशु बैद का कहना है कि हेल्थकेयर पर खर्च बढ़ाने की जरूरत है। हमारा हेल्थकेयर खर्च GDP का 2.5% होना चाहिए। साथ ही टियर 3 और 4 शहरों में, हमें बेहतर हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। इसलिए उन शहरों में अस्पताल शुरू करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ विशेष निर्यात प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए, क्योंकि भारत का निर्यात अभी भी पीछे है। हमारे पास अभी भी स्वस्थ विदेशी मुद्रा है, लेकिन हमारा निर्यात अभी भी चीन या शायद अन्य विकासशील देशों से बहुत पीछे है। इसलिए भारत को मजबूत बनाने के लिए निर्यात प्रोत्साहन पर थोड़ा सपोर्ट भी महत्वपूर्ण है। बजट 2026 को 1 फरवरी को पेश किया जाना है।

क्लिनिकल एविडेंस एंड वैलिडेशन ग्रांट्स की हो घोषणा


न्यूरोइक्विलिब्रियम के फाउंडर रजनीश भंडारी का कहना है, "भारत तेजी से मेडटेक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है, जिसमें निर्यात 4 अरब डॉलर से अधिक है। मेडटेक सेक्टर के 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस बदलाव में तेजी लाने के लिए बजट में 'क्लिनिकल एविडेंस एंड वैलिडेशन ग्रांट्स' की घोषणा होनी चाहिए। यह डेडिकेटेड फंड मल्टी सेंटर स्टडीज, असल दुनिया में मिलने वाले साक्ष्यों, इलाज की लागत और उससे फायदे पर रिसर्च को फाइनेंस करने के लिए होना चाहिए।

आकाश हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आशीष चौधरी ने कहा कि सबसे बड़ी जरूरत लोगों में निरंतर निवेश द्वारा सपोर्टेड एक लॉन्ग टर्म हेल्थकेयर पॉलिसी की है। उन्होंने कहा, "भारत ने हॉस्पिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और इंश्योरेंस कवरेज बढ़ाने में प्रगति की है। लेकिन अब हमें हेल्थकेयर पॉलिसी और ह्यूमन रिसोर्स पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।" आगे कहा, "बजट में डॉक्टरों, नर्सों और सहयोगी हेल्थ स्टाफ की ट्रेनिंग और अपस्किलिंग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही लगातार मेडिकल एजुकेशन पर भी ध्यान देना चाहिए। अच्छी तरह से प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स के बिना, सबसे अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर भी अच्छी क्वालिटी की देखभाल नहीं दे सकता।"

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मेट्रो शहरों के बाहर मेडिकल एजुकेशन की जाए मजबूत

डॉ. चौधरी ने मेट्रो शहरों के बाहर मेडिकल एजुकेशन को मजबूत करने के महत्व पर भी जोर दिया। टीचिंग हॉस्पिटल्स के लिए टारगेटेड इंसेंटिव, सिमुलेशन-बेस्ड ट्रेनिंग, सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल्स के बीच पार्टनरशिप टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों में कमी को दूर करने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा, "भविष्य के लिए तैयार हेल्थकेयर सिस्टम इस बात पर निर्भर करता है कि हम आज की मेडिकल वर्कफोर्स को कितनी अच्छी तरह तैयार करते हैं।"

अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज लिमिटेड की प्रमोटर डायरेक्टर और अपोलो हेल्थको की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन शोभना कामिनेनी का कहना है, "एक विकसित भारत, 2047 तक लगभग एक अरब मजबूत स्वस्थ युवाओं और वर्कफोर्स पर बनेगा। एक प्रिवेंशन-फर्स्ट हेल्थकेयर सिस्टम बड़े पैमाने पर शुरुआती जोखिम का पता लगाने, पर्सनलाइज्ड देखभाल और लंबे समय तक प्रोडक्टिविटी को अनलॉक कर सकता है। जैसे भारत ने डिजिटल पेमेंट में दुनिया का नेतृत्व किया, वैसे ही प्रिवेंटिव हेल्थकेयर हमारा अगला ग्लोबल एक्सपोर्ट हो सकता है।"

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