UP Budget: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का 10वां और इस कार्यकाल का अंतिम बजट पेश हो रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आ रहे इस बजट का आकार करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। दिलचस्प बात यह है कि 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश का यह बजट पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान (5.65 लाख करोड़), बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों के कुल बजट से भी कहीं ज्यादा बड़ा है। इस बार के बजट में विकास के साथ-साथ चुनावी सौगातों की भी बौछार होने की उम्मीद है।
पेंशन में हो सकती है 50% तक बढ़ोतरी
चुनावी साल को देखते हुए सरकार का सबसे बड़ा फोकस उन वर्गों पर है जो लंबे समय से मांगों को लेकर मुखर रहे हैं। माना जा रहा है कि वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन की राशि को 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति माह किया जा सकता है। इसके साथ ही, राज्य के करीब 1.5 लाख शिक्षामित्रों और 27 हजार अनुदेशकों के मानदेय में 2-2 हजार रुपये की वृद्धि का ऐलान संभव है। सरकार संविदा कर्मियों के लिए एक नया 'आउटसोर्सिंग कर्मचारी सेवा निगम' भी बना चुकी है, जिसके जरिए 50 हजार नई भर्तियों और बीमा-फंड जैसी सुविधाओं की घोषणा हो सकती है।
एक्सप्रेसवे और मेट्रो का 'सुपरफास्ट' विस्तार
उत्तर प्रदेश को 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' बनाने की दिशा में सरकार विंध्य एक्सप्रेसवे (वाराणसी से चित्रकूट), झांसी लिंक और जेवर लिंक जैसे 12 नए प्रोजेक्ट्स के लिए भारी बजट आवंटित करेगी। शहरों की रफ्तार बढ़ाने के लिए लखनऊ और नोएडा मेट्रो के विस्तार के साथ-साथ वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, झांसी और मथुरा जैसे धार्मिक व पर्यटन केंद्रों में मेट्रो चलाने के लिए फंड का प्रावधान किया जाएगा। साथ ही, जेवर एयरपोर्ट के अगले चरण और रैपिड रेल के मेरठ से आगे विस्तार के लिए भी खजाना खुल सकता है।
क्या आएगी 'लाडली बहन' जैसी कोई बड़ी योजना?
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में 'लाडली बहन' योजना की सफलता को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि योगी सरकार भी महिलाओं के लिए कोई बड़ी कैश-ट्रांसफर योजना ला सकती है। इसके अलावा, युवाओं के लिए रोजगार गारंटी या स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़े फंड का ऐलान हो सकता है। सरकार का लक्ष्य इस बजट के जरिए न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है, बल्कि समाज के हर तबके महिला, युवा, किसान और श्रमिक को साधकर 2027 की चुनावी राह को आसान बनाना है।