ममता बनर्जी के हाथों से गई TMC! पार्टी से निकाले गए विधायक को मिला LoP पद

बागी गुट ने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा, जिसमें ममता बनर्जी को पार्टी नेता, रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता और श्युली साहा, जावेद खान, संदीपन साहा व सबीना यास्मीन को उपनेता बनाने की मांग की गई। स्पीकर ने उनकी ये मांग मान ली है। रितब्रत बनर्जी यह भी कहा कि जो विधायक उनके साथ नहीं हैं, उनकी जिम्मेदारी उनका गुट नहीं लेता

अपडेटेड Jun 03, 2026 पर 6:38 PM
TMC में बगावत सफल? पार्टी से निकाले गए विधायक को मिला LoP पद, ममता बनर्जी को बहुत बड़ा झटका!

पश्चिम बंगाल में चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सियासी घमासान खुलकर सामने आ गया है। पार्टी से निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उनके साथ 59 विधायक हैं और इसी समर्थन के आधार पर उन्होंने विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) पद पर दावा ठोक दिया। ममता बनर्जी को सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस ने रितब्रत के दावे को स्वीकार करते हुए उन्हें विपक्ष के नेता के कमरे की चाबी भी सौंप दी।

यह कदम TMC प्रमुख ममता बनर्जी के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा है। ममता ने विपक्ष के नेता पद के लिए वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय का समर्थन किया था, लेकिन बागी विधायक उन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

बागी गुट ने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा, जिसमें ममता बनर्जी को पार्टी नेता, रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता और श्युली साहा, जावेद खान, संदीपन साहा व सबीना यास्मीन को उपनेता बनाने की मांग की गई।


"हम 60 विधायकों का समूह हैं"

मीडिया से बातचीत में रितब्रत बनर्जी ने कहा, "हम विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हमारे साथ 60 विधायक हैं। हम ममता बनर्जी से अनुरोध करेंगे कि वह हमारी मार्गदर्शक बनी रहें। हम रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे।"

उन्होंने यह भी कहा कि जो विधायक उनके साथ नहीं हैं, उनकी जिम्मेदारी उनका गुट नहीं लेता।

'महाराष्ट्र मॉडल' की चर्चा

TMC के कई नेताओं का आरोप है कि बागी विधायक "महाराष्ट्र मॉडल" अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। यानी वैसा ही राजनीतिक घटनाक्रम, जैसा शिवसेना में एकनाथ शिंदे और NCP में अजित पवार के नेतृत्व में हुआ था, जहां बड़ी संख्या में विधायक अलग होकर पार्टी पर दावा करने लगे थे।

बताया जा रहा है कि बागी गुट दो-तिहाई से ज्यादा विधायकों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है, ताकि दल-बदल कानून की कार्रवाई से बचा जा सके।

पार्टी बैठकों से गायब होने लगे विधायक

चुनाव हारने के बाद TMC की बैठकों में विधायकों की मौजूदगी लगातार घटती गई।

  • 6 मई को 80 में से 71 विधायक बैठक में पहुंचे थे।
  • 19 मई को संख्या घटकर 65 रह गई।
  • 31 मई को सिर्फ 20 विधायक ही पहुंचे।

इसी दौरान कई विधायक पार्टी कार्यक्रमों और विरोध प्रदर्शनों से भी दूर रहे।

दो विधायकों के निष्कासन से बढ़ा विवाद

संकट तब और गहरा गया जब रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता के नाम वाले प्रस्ताव में उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल किए गए।

इसके बाद TMC ने दोनों विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया।

संदीपन साहा ने पलटवार करते हुए कहा, "पार्टी अनैतिक काम करने वालों का साथ देती है और नैतिक काम करने वालों को बाहर निकाल देती है।"

ममता का हमला

ममता बनर्जी ने भी बागी गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने रितब्रत को मौका दिया, लेकिन अब वही पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कुछ विधायकों पर दबाव बनाकर पार्टी तोड़ने की कोशिश कर रही है।

इस बगावत के बीच TMC नेतृत्व ने सभी पार्टी समितियां और सहयोगी संगठन भंग करने का फैसला किया है।

पार्टी का कहना है कि अब संगठन की पूरी समीक्षा, आत्ममंथन और प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा, जिसके बाद नया ढांचा तैयार होगा।

BJP ने क्या कहा?

सत्तारूढ़ BJP ने इसे TMC का अंदरूनी मामला बताया है।

राज्य BJP अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने कहा, "BJP में TMC नेताओं की एंट्री नहीं होगी। हम बिना किसी को शामिल किए 207 सीटें जीतकर आए हैं। TMC के नेताओं के लिए हमारे दरवाजे बंद हैं।"

बंगाल में चुनावी हार के बाद TMC अब अपने सबसे बड़े अंदरूनी संकट से गुजरती दिख रही है। रितब्रत बनर्जी के साथ बड़ी संख्या में विधायकों के खड़े होने के दावे और विधानसभा अध्यक्ष की ओर से उनके दावे को स्वीकार करने से पार्टी में संभावित टूट की अटकलें और तेज हो गई हैं। अब सबकी नजर ममता बनर्जी के अगले कदम और बागी विधायकों की वास्तविक संख्या पर टिकी है।

TMC को टूटने से बचाने के लिए ममता ने चला आखिरी दांव, भंग की पार्टी की सभी कमेटियां, अब क्या करेंगे बागी विधायक?

 

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