36 देशों से 274 भगोड़ों को लाया गया वापस, ₹17,874 करोड़ की संपत्ति भी अटैच
India Most Wanted Criminals: 2019 से 2026 के बीच वापस लाए गए भगोड़ों में से 9 लोग आर्थिक अपराधों, 17 लोग आतंकी मामलों, 42 लोग संगठित आपराधिक गतिविधियों, 62 लोग हत्या, डकैती और हिंसक अपराधों, 53 लोग यौन अपराधों और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों, 16 लोग ड्रग्स तस्करी, 12 लोग तस्करी और जाली नोट वगैरह के अपराधों के मामलों में वांछित थे
India Most Wanted Criminals: कांग्रेस की अगुवाई वाली UPA सरकार में हर साल करीब चार भगोड़ों को वापस लाया गया था
India Most Wanted Criminals: केंद्रसरकार ने मंगलवार (4 अगस्त) को बताया कि पिछले सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़ों को वापस लाया गया है। यह संख्या प्रतिवर्ष औसतन करीब 40 है जो 2004-13 की अवधि की तुलना में 10 गुना अधिक है। उस वक्त हर साल करीब चार भगोड़ों को वापस लाया गया था। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सरकार ने इस दौरान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति भी कुर्क की है।
इसमें दावा किया गया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान भगोड़ों को वापस लाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी। जबकि (नरेंद्र) मोदी सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया है।
इन अपराधों में थे शामिल
बयान के अनुसार, 2019 से 2026 (जुलाई तक) के बीच वापस लाए गए भगोड़ों में से नौ लोग आर्थिक अपराधों, 17 लोग आतंकी मामलों, 42 लोग संगठित आपराधिक गतिविधियों, 62 लोग हत्या, डकैती और हिंसक अपराधों, 53 लोग यौन अपराधों और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों, 16 लोग मादक पदार्थ की तस्करी, 12 लोग तस्करी और जाली नोट वगैरह, 18 लोग मानव तस्करी और 45 लोग अन्य अपराधों के मामलों में वांछित थे।
गृह मंत्री अमित शाह ने X पर एक पोस्ट में कहा, "मोदी सरकार ने एकीकृत, खुफिया जानकारी आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित अभियान शुरू किए हैं, जिनके जरिए विदेशों में छिपे भगोड़ों का लगातार पता लगाया जा रहा है।"
उन्होंने कहा, "तीन नए कानूनों में (आरोपियों की) अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने के प्रावधान ने न्याय व्यवस्था को फरार अपराधियों के खिलाफ भी कानूनी कार्यवाही शुरू करने का अधिकार दिया है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के सख्त अनुपालन के चलते 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गईं और 18,762 करोड़ रुपये की बरामदगी सुनिश्चित की गई।"
विदेशों में छिपे भगोड़ों पर शिकंजा
शाह ने कहा कि मजबूत और सुरक्षित भारत की परिकल्पना के तहत मोदी सरकार ने विदेशों में छिपे भगोड़ों पर शिकंजा कस दिया है। उन्होंने कहा, "वे भागकर चाहे किसी भी देश में गए हों, राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति भारत के नये दृष्टिकोण ने वर्ष 2019 से अब तक 274 अपराधियों की स्वदेश वापसी सुनिश्चित की है, जबकि संप्रग शासन के दौरान औसतन केवल चार अपराधियों को ही हर वर्ष वापस लाया जाता था।"
उन्होंने कहा, "वे दिन अब बीत चुके हैं जब अपराधी व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाकर बच निकलते थे। नये भारत ने नये कानूनों, संस्थानों और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से पुरानी व्यवस्था की हर कमी को दूर कर एक अभेद्य सुरक्षा जाल तैयार किया है।"
'रेड कॉर्नर नोटिस' जारी करने की संख्या में वृद्धि
मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि इंटरपोल द्वारा 'रेड कॉर्नर नोटिस' जारी करने की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112, और 2026 में अब तक 182 रेड कार्नर नोटिस जारी किये गए हैं। बयान में कहा गया है कि पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ 'रेड कार्नर नोटिस' जारी किए गए हैं।
'रेड कार्नर नोटिस' दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से किसी व्यक्ति का पता लगाने और उसे अस्थायी रूप से गिरफ्तार करने का अनुरोध होता है, ताकि उसके प्रत्यर्पण, आत्मसमर्पण कराने या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई की जा सके।
गृह मंत्रालय ने कहा, "केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, अब प्रत्यर्पण के अनुरोध अधिक पेशेवर और मानक तरीके से तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा, जिस देश से प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया है, उसकी दस्तावेजी जरूरतों और कानूनी अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए लिखित आश्वासन भी दिए जाते हैं।"
बयान में यह भी कहा गया है कि 2004 से 2013 के बीच भारत औसतन हर साल सिर्फ चार भगोड़ों को ही प्रत्यर्पित करा सका, जबकि प्रत्यर्पण के 110 अनुरोध लंबित पड़े रहे। मंत्रालय ने कहा कि 2014 से पहले देश का प्रत्यर्पण ढांचा पुराना हो चुका था। भारत की प्रत्यर्पण संधियां केवल 37 देशों के साथ थीं। साथ ही, आर्थिक भगोड़ों से निपटने या उनकी संपत्ति कुर्क करने के लिए कोई विशेष कानून नहीं था।
बयान में कहा गया है कि भगोड़ों द्वारा विदेश में नाम या पहचान बदल ली गई थी। लेकिन फिर भी प्रौद्योगिकी और प्रोफाइल-मैपिंग के जरिए उन्हें खोज निकाला गया। प्रत्यर्पण प्रक्रिया तेज करने के लिए वीडियो कॉन्फ़्रेंस से मुकदमों की सुनवाई जैसी प्रौद्योगिकी का भी उपयोग किया जा रहा है।