पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कई बड़े फैसले लिए हैं। ऐसे ही एक अहम फैसले के बारे में उन्होंने उत्तम कुमार शताब्दि समारोह में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जाने-माने फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को राज्य सरकार का सलाहकार नियुक्त किया गया है। वह पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक मामलों के मंत्रालय में अपनी सेवाएं देंगे। इस पद के तहत उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होगा। बता दें, सांस्कृतिक मंत्रालय सुवेंदु अधिकारी के पास है।
यह कार्यकारी आदेश तुरंत लागू होगा और अगली सूचना तक वैध रहेगा। पश्चिम बंगाल में इस साल हुए विधान सभा चुनाव के बाद सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार ने सत्ता संभाली है। अब राज्य में सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने और फिल्म इंडस्ट्री को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मकसद बंगाल की समृद्ध फिल्म विरासत को बढ़ावा देना और राज्य को एक बड़े सांस्कृतिक व सिनेमाई केंद्र के तौर पर स्थापित करना है। इसी कड़ी में अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को सरकार में एक अहम जिम्मेदारी दी गई है।
चक्रवर्ती की नियुक्ति का आदेश हो चुका है जारी
इस रणनीतिक नियुक्ति को कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग ने (IAS सेल) ने 6 अक्टूबर, 2026 को औपचारिक तौर पर नोटिफाई किया था। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, यह नोटिफिकेशन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के आदेश से, काबिल अथॉरिटी से साफ अप्रूवल के बाद जारी किया गया था। प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया कि यह रणनीतिक फैसला पूरी तरह से “आम जनता के हित में” लागू किया गया था, जो सांस्कृति नीति और क्षेत्रीय मनोरंजन पहल को स्ट्रीमलाइन करने के लिए राज्य की बढ़ी हुई कोशिश को दिखाता है।
फिल्म इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का जोर
मृणाल सेन की फिल्म से 1976 में किया था डेब्यू
बड़े पैमाने पर 'बंगाल के गौरव' के तौर पर मशहूर, मिथुन चक्रवर्ती भारतीय सिनेमा के एक ऐसे दिग्गज हैं जिन्होंने दशकों तक राष्ट्रीय मंच पर पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक बिरादरी को दिखाया है। उन्होंने मृणाल सेन की मशहूर 1976 की आर्ट-हाउस ड्रामा 'मृगया' से एक्टिंग में डेब्यू किया, और अपनी पहली ही सिनेमाई परफॉर्मेंस के लिए बेस्ट एक्टर का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। इस सफलता के बाद, चक्रवर्ती हिंदी और बंगाली दोनों सिनेमा में स्टार बन गए, और खुद को देश के सबसे मशहूर जन-आंदोलनों में से एक और हमेशा रहने वाले सांस्कृतिक राजदूत के रूप में स्थापित किया।