DK Shivakumar: कांग्रेस के संकटमोचक से कर्नाटक के मुख्यमंत्री तक...किसी फिल्म से कम नहीं है डीके शिवकुमार की कहानी
DK Shivakumar: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के सीनियर नेता डीके. शिवकुमार अब मुख्यमंत्री बन गए हैं। डोड्डा अलाहल्ली गांव की धूल भरी गलियों से लेकर कर्नाटक के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक शिवकुमार की चार दशक लंबी यात्रा उनके संघर्ष, विजय और कांग्रेस के प्रति अटूट निष्ठा को दर्शाती है
DK Shivakumar: कांग्रेस के सीनियर नेता डीके शिवकुमार अब कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन गए हैं
DK Shivakumar: कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने बुधवार (3 जून) को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 64 वर्षीय शिवकुमार को लोक भवन के 'ग्लास हाउस' में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी और पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत कई अन्य नेता शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही आठ बार के विधायक डी.के. शिवकुमार का वह वह सपना साकार हो गया, जिसके लिए उन्होंने लंबे समय तक राजनीतिक संघर्ष किया।
शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जी.परमेश्वर और 12 अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। उन्होंने संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के नाम पर शपथ ली। परमेश्वर इस नई सरकार में उप मुख्यमंत्री होंगे। परमेश्वर के अलावा जिन 12 नेताओं ने मंत्रीपद की शपथ ली उनमें केएच मुनियप्पा, के जे जॉर्ज, एमबी पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायरेगौड़ा, प्रियंक खरगे, यू टी खादर, ईश्वर खंड्रे, यतींद्र सिद्धरमैया, बिरथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल शामिल हैं।
डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच काफी समय तक चली खींचतान का अंत पिछले सप्ताह कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री के पद छोड़ने के साथ हुआ। सिद्धारमैया ने कांग्रेस आलाकमान के निर्देश के बाद बीते 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस कदम से दक्षिण भारत में पार्टी के संकटमोचक माने जाने वाले शिवकुमार के लिए यह पद ग्रहण करने का रास्ता साफ हुआ।
कांग्रेस के संकटमोचक से मुख्यमंत्री तक का सफर
डोड्डा अलाहल्ली गांव की धूल भरी गलियों से लेकर कर्नाटक के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक डी. के. शिवकुमार की चार दशक लंबी यात्रा उनके संघर्ष, विजय और कांग्रेस के प्रति अटूट निष्ठा को दर्शाती है। शिवकुमार को 'कनकपुरा बंदे' के नाम से जाना जाता है। यानी कनकपुरा की ग्रेनाइट चट्टान... यह वही विधानसभा क्षेत्र है जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के ‘संकट मोचक’ के रूप में भी ख्याति अर्जित की है। उन्हें राजनीति में पहला बड़ा मौका 1985 में मिला जब उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर सथानूर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। हालांकि वे असफल रहे।
8 बार बने विधायक
चार साल बाद, उन्होंने उस निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की और 1989 में विधानसभा में एंट्री किया। तब से, उन्होंने बिना किसी रुकावट के लगातार आठ विधानसभा चुनाव जीते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, 64 वर्षीय नेता ने स्वयं को कांग्रेस पार्टी के प्रमुख वोक्कालिगा नेता के रूप में स्थापित किया है। वोक्कालिगा कर्नाटक के प्रमुख कृषि समुदायों में से एक हैं। कांग्रेस आलाकमान ने 2017 में शिवकुमार के राजनीतिक प्रबंधन कौशल की परीक्षा ली, जब उन्हें राज्यसभा चुनावों से पहले बेंगलुरु में गुजरात के 42 कांग्रेस विधायकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई ताकि ‘क्रॉस वोटिंग’ को रोका जा सके।
वह पार्टी नेतृत्व की उम्मीदों पर खरा उतरे और गुजरात से कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल ने जीत दर्ज की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस घटना ने शिवकुमार को व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से भारी नुकसान पहुंचाया, क्योंकि उस दौरान आयकर विभाग ने उनसे जुड़ी संपत्तियों पर छापेमारी की थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित थी। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कई छापे और तलाशी अभियान भी चलाए गए।
2019 में हुए थे गिरफ्तार
शिवकुमार को तीन सितंबर 2019 को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में 50 दिनों के लिए रखा गया। हालांकि कई लोगों का मानना था कि जेल से वह डर जाएंगे या BJP के खेमे में चले जाएंगे। लेकिन कांग्रेस के प्रति उनकी निष्ठा और भी मजबूत होती नजर आई। उनके संगठनात्मक कौशल, राजनीतिक दृढ़ता और पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता ने कांग्रेस आलाकमान को प्रभावित किया, जिसने उन्हें 2020 में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया।
शिवकुमार ने कर्नाटक में कांग्रेस के लिए एक कठिन दौर में कार्यभार संभाला। पार्टी ने 2018 के विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन किया था। फिर 2019 के लोकसभा चुनावों में यह झटका और गहरा गया, जब पीएम मोदी लहर के बीच कांग्रेस राज्य की 28 सीटों में से केवल एक सीट जीतने में कामयाब रही। भगवा पार्टी ने 26 सीटें जीतीं जिनमें मांड्या से बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुमालता अंबरीश की सीट भी शामिल थी।
कांग्रेस को एकमात्र जीत बेंगलुरु ग्रामीण से मिली, जिसे शिवकुमार के भाई डी.के. सुरेश ने जीता। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के एक महीने बाद एच.डी. कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-JDS गठबंधन सरकार 18 कांग्रेस और जदएस विधायकों की अयोग्यता के बाद गिर गई। इनमें से कई विधायक बाद में BJP में शामिल हो गए और पार्टी को राज्य में चौथी बार सत्ता में लौटने में मदद की। इसके बाद 18 सीटों पर हुए उपचुनाव कांग्रेस-JDS गठबंधन के लिए किसी बुरे सपने सरीखे रहे, जिसमें BJP ने 15 सीटों पर जीत हासिल की।
शिवकुमार से संभाली पार्टी
खराब प्रदर्शन के बाद, तत्कालीन कर्नाटक अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने इस्तीफा दे दिया। जबकि सिद्धारमैया ने कांग्रेस विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया। इन्हीं परिस्थितियों में कांग्रेस नेतृत्व ने 2020 में अपने भरोसेमंद सहयोगी शिवकुमार की ओर रुख किया। इसके बाद उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की, और 224 सदस्यीय सदन में 134 सीटें जीतीं।
शिवकुमार के अनुसार, निर्दलीय विधायकों के समर्थन से पार्टी की प्रभावी संख्या बाद में बढ़कर 140 हो गई। 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान उन्हें एक और महत्वपूर्ण परीक्षा का सामना करना पड़ा। उन्होंने 2019 में कर्नाटक में कांग्रेस की एक सीट की संख्या को 2024 में नौ सीटों तक बढ़ाकर एक बार फिर अपनी राजनीतिक सूझबूझ का प्रदर्शन किया। 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की शानदार जीत के बाद, शिवकुमार को बेंगलुरु विकास और जल संसाधन मंत्रालय का प्रभार सौंपते हुए उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था।
कुछ नेताओं द्वारा राज्य इकाई के नेतृत्व में बदलाव की मांग के बावजूद, वे कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष के भी बने रहे। हालांकि, 20 नवंबर, 2025 को कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद, नेतृत्व परिवर्तन और सिद्धारमैया एवं शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष को लेकर अटकलें तेज हो गईं। अंततः, शिवकुमार कांग्रेस विधायक दल के नेता चुने गए और तीन जून को कर्नाटक की कमान संभाल ली।
बेंगलुरु दक्षिण जिले के कनकपुरा कस्बे के पास डोड्डा अलाहल्ली गांव में केम्पेगौड़ा और गौराम्मा के घर 15 मई, 1962 को जन्मे शिवकुमार ने 1980 के दशक की शुरुआत में अपने कॉलेज के दिनों के दौरान राजनीति में एंट्री किया। 1993 में शिवकुमार ने उषा से शादी की। इस कपलकी दो बेटियां, ऐश्वर्या और आभरना एवं एक बेटा आकाश है।
कांग्रेस के संकटमोचक से CM तक
किसी फिल्म से कम नहीं है डीके शिवकुमार की कहानी
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