परिवार में जमीन और संपत्ति को लेकर विवाद अक्सर देखने को मिलते हैं। खासकर तब, जब किसी सदस्य को बाद में पता चलता है कि पिता ने अपनी संपत्ति पहले ही किसी दूसरे बच्चे के नाम कर दी थी।

परिवार में जमीन और संपत्ति को लेकर विवाद अक्सर देखने को मिलते हैं। खासकर तब, जब किसी सदस्य को बाद में पता चलता है कि पिता ने अपनी संपत्ति पहले ही किसी दूसरे बच्चे के नाम कर दी थी।
ऐसा ही एक मामला ओडिशा की रहने वाली एक महिला का सामने आया है। उन्होंने मनीकंट्रोल के जरिए एक्सपर्ट से सवाल पूछा है कि क्या वह अपने पिता की उस जमीन में हिस्सा मांग सकती हैं, जिसे उनके पिता ने उनकी जानकारी के बिना उनके भाइयों को बेच दिया था।
क्या है ये पूरा मामला?
महिला ने बताया कि उनके पिता की चार संतान थीं- दो बेटे और दो बेटियां। वह सबसे बड़ी बेटी हैं। उनकी अविवाहित बहन का दो साल पहले कैंसर से निधन हो गया था। उस समय बहन उनकी मां के साथ रह रही थीं।
महिला के मुताबिक, उनके पिता ने साल 2005 में भुवनेश्वर की अपनी जमीन दोनों छोटे बेटों को बेच दी थी। बाद में भाइयों ने वहां घर बना लिया और अब वहीं रह रहे हैं। महिला को इस बिक्री की जानकारी हाल ही में मिली। उनके पिता का निधन साल 2015 में हो चुका है।
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
मुंबई के CA और CFP बलवंत जैन के मुताबिक, इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि जमीन पिता की स्वयं खरीदी हुई यानी सेल्फ-एक्वायर्ड प्रॉपर्टी थी।
उन्होंने बताया कि हिंदू कानून के तहत किसी व्यक्ति को अपनी खरीदी संपत्ति को अपनी इच्छा के अनुसार बेचने, गिफ्ट करने या किसी को भी देने का अधिकार होता है।
क्या बेटी बिक्री पर आपत्ति कर सकती है?
बलवंत जैन का कहना है कि अगर पिता ने अपने जीवनकाल में जमीन बेटों को बेच दी, तो सामान्य तौर पर बेटी उस बिक्री पर कानूनी आपत्ति नहीं कर सकती।
कानून किसी व्यक्ति को यह अधिकार देता है कि वह अपनी स्वयं अर्जित संपत्ति किसी भी व्यक्ति को बेच सकता है। वह चाहे तो संपत्ति किसी एक बेटे, बेटी या परिवार से बाहर के व्यक्ति को भी दे सकता है। ऐसी स्थिति में भी कानूनी वारिसों के लिए उस फैसले को चुनौती देना आसान नहीं होता। क्योंकि इस मामले में कानूनी नियम उनके साथ नहीं रहते।
बेटी को संपत्ति में हिस्सा कब मिलता है?
कानून यह भी कहता है कि अगर कोई व्यक्ति बिना वैध वसीयत छोड़े मृत्यु करता है और उसके नाम पर कुछ संपत्ति बची हुई है, तब उसके कानूनी वारिसों को उसमें हिस्सा मिलता है। इसमें बेटियां भी बराबर की हकदार होती हैं।
लेकिन जिस संपत्ति को व्यक्ति अपने जीवनकाल में बेच चुका हो, उस पर बाद में कानूनी वारिस आमतौर पर दावा नहीं कर सकते।
इस मामले में क्या होगा?
बलवंत जैन का कहना है कि इस मामले में भी क्योंकि महिला के पिता ने जमीन अपने जीवनकाल में बेच दी थी, इसलिए उस जमीन के बिक्री सौदे को चुनौती देना मुश्किल होगा।
हालांकि अगर पिता के नाम पर कोई दूसरी संपत्ति बची हो और उसके लिए कोई वैध वसीयत न बनाई गई हो, तो महिला उस संपत्ति में अपने हिस्से का दावा कर सकती हैं।
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